बिना कर्तव्य पालन के एकाग्रता नही आती – संत श्री स्वामी संवित सोमगिरी जी महाराज

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मन्दसौर  – ईपत्रकार.कॉम |एकात्म यात्रा आज मंदसौर से प्रस्थान कर बोतलगंज, रिछाबच्च, पिपलियापंथ होते हुए पिपलियामण्डी पहुंची। एकात्म यात्रा का रास्ते में जगह-जगह भव्य स्वागत हुआ। पिपलियामण्डी पहुंचने पर भव्य स्वागत के साथ ही क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों ने पहुंच कर यात्रा की अगुवाई की। पिपलियामण्डी में कलशयात्रा निकाली गई जिसमें व्यापक रूप से जनसेलाब शामिल हुआ। कलशयात्रा को शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ले जाया गया। जहा पर जनसंवाद (धर्मसभा) कार्यक्रम हुआ। इस धर्म सभा में एकात्म यात्रा के नेतृत्वकर्ता संत स्वामी संवित सोम गिरी जी महाराज बीकानेर, स्वामी भूमानंद सरस्वती जी महाराज, साध्वी सीता बहन जी, मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद श्री सुधीर गुप्ता, मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष एवं यात्रा के राज्यस्तर के सह समन्वयक श्री नारायण व्यास उपाध्यक्ष गो संवर्धन बोर्ड, जिला पंचायत अध्यक्षा श्रीमती प्रियंका मुकेशगिरी गोस्वामी, विधायक श्री जगदीश देवड़ा, यात्रा के जिला संयोजक श्री मदनलाल जी राठौर, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक मंदसौर, जनपद परिषद अध्यक्ष श्री राजेन्द्र भारद्वाज, जन अभियान परिषद के संभाग समन्वयक श्री वरुण आचार्य, कलेक्टर श्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार सिंह, एएसपी श्री कनेश सहित जिलाधिकारी उपस्थित थे।

धर्मसभा को संबोधित करते हुये संत स्वामी संवित सोम गिरी जी महाराज ने कहा कि बिना कर्तव्य पालन के जीवन में एकाग्रता नहीं आ सकती। कर्तव्य से विमुख होने पर मन भटकने लगता है। एकाग्रता के लिये मन का शांत होना जरूरी है। एकात्म यात्रा घर-घर में शुरू होनी चाहीए। यह जो यात्रा चल रहीं है इसे 22 जनवरी तक ही सिमित न रखें इसे घर एवं अपने स्वयं के अन्दर निरन्तर चलने दे। एकात्म यात्रा में हम अकेले नहीं है पुरा भारत अपने से जुडा हुआ है, इसमें आप सभी भी आते है। आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा ज्ञान को लेकर यात्रा प्रारम्भ की गई थी। उनकी यात्रा का उद्देश्य किसी मत को परिवर्तन करना नहीं था। बल्कि पूरे भारत को एक करना था। उस समय बौद्ध धर्म का वैदिक धर्म पर व्यापक असर दिखने लगा था। वैदिक धर्म को बचाये रखने के लिये आदि गुरू शंकराचार्य जी ने अथक प्रयास किये। भारतीय संस्कृति का पूरा सार वैदों में लिखा हुआ है। वैदों को समझना एवं अपने जीवन में उतारना चाहिए, आज के समय में स्कूल शिक्षा में वैदो के ज्ञान को नहीं बताया जाता। जिससे वैदिक ज्ञान से आने वाली पीढी वंचित होती जा रही है। व्यक्ति को न्यास एवं ब्रह्मचर्य को ठीक करना चाहिए तभी जाकर सन्यास आश्रम ठीक होता है और चारो आश्रमों में गृहस्थ आश्रम सबसे महत्वपूर्ण आश्रम है। ब्रह्मज्ञान के बारे में बताते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान वही प्राप्त कर सकता है जिसकी दृष्टी सही होती है अर्थात सत्य को पहचानने की शक्ति। नारी की उपासना एवं सम्मान करना चाहिए, लडकी के जन्म पर उत्सव मनाना चाहिए तभी घर में सुख एवं लक्ष्मी का वास होता है।

सांसद श्री गुप्ता ने कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा प्रदेश की धरती पर आज से 12 सौ वर्ष पूर्व चरण रखे गये और उन्होने सबको एकजुट रखने के लिये 4 मठों की स्थापना की इसी तारतम्य में यह यात्रा 19 दिसम्बर से प्रारम्भ होकर 21 जनवरी को ओंकारेश्वर में पूर्ण होगी। इस यात्रा में 7 करोड से अधिक लोगो ने सहभागिता दी। इस सहभागिता से ही ओंकारेश्वर में 108 फिट ऊची आदि गुरू शंकराचार्य की प्रतिमा स्थापीत होगी। साध्वी सीता बहन द्वारा कहा गया कि शंकराचार्य भगवान शंकर के अवतार थे जोकि वैदिक धर्म को बचाने के लिये अवतरीत हुए थे। धर्मसभा में यात्रा के जिला संयोजक श्री मदनलाल जी राठौर द्वारा सभी को संकल्प दिलाया गया कि में संकल्प लेता हु कि जीव, जगत एवं जगदीश के मूलभूत एकात्म भाव को आत्मसात कर स्वयं को उन्नत करूंगा और इस एकात्मता के जरिये एक बेहतर समाज, राष्ट्र एवं विश्व को निर्मित करने में अपना योगदान दूंगा।