भौतिकता की अग्नि में दग्ध दुनिया को शांति का दिगदर्शन अद्वैत दर्शन ही करायेगा -मुख्यमंत्री श्री चौहान

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मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भौतिकता की अग्नि में दग्ध दुनिया को शांति का दिगदर्शन अद्वैत दर्शन ही करायेगा। भारतीय सांस्कृतिक एकता एवं सामाजिक समरसता के ध्वज वाहक आदि गुरू शंकराचार्य द्वारा बताए गए अद्वैतवाद दर्शन में दुनिया की सब समस्याओं का समाधान निहित है। श्री चौहान आज ग्वालियर में आदि गुरू शंकराचार्य की प्रतिमा के लिये धातु संग्रहण एवं जन-जागरण के उद्देश्य से आई “एकात्म यात्रा” के जन-संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह, उच्च शिक्षा मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया, महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मनीषा भुजवल सिंह यादव, विधायक सर्वश्री नारायण सिंह कुशवाह, भारत सिंह कुशवाह, सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री बालेन्दु शुक्ल, साडा अध्यक्ष श्री राकेश सिंह जादौन, जीडीए के अध्यक्ष श्री अभय चौधरी, महामण्डलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज, महामण्डलेश्वर राधे-राधे बाबा जी, संत श्री रामदास महाराज दंदरौआ सरकार, संत श्री रामसेवकदास महाराज गंगादास की शाला, संत श्री दादा रमेशलाल जी धर्मपुरी धाम व राजयोगिनी ब्रम्हाकुमारी अवधेश दीदी, संत कृपाल सिंह जी महाराज सहित अन्य संतजन, यात्रा संयोजक श्री राजेश सोलंकी एवं अन्य जन-प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में भगवान को प्राप्त करने के तीन मार्ग ज्ञानमार्ग, भक्तिमार्ग एवं कर्ममार्ग बताए गये हैं। आदि गुरू शंकराचार्य ज्ञान, भक्‍ति एवं कर्म मार्ग के त्रिवेणी संगम थे। जिस समय भारतीय समाज विभिन्न मत-मतांतर एवं कर्मकाण्डों में उलझा हुआ था, ऐसी विपरीत परिस्थितियों में आदि गुरू शंकराचार्य भारतीय सनातन संस्कृति के प्रणेता के रूप के सामने आए। उन्होंने भारत को चारों दिशाओं में जोड़ने का काम किया। आदि गुरू ने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की और अद्वैत दर्शन को जन-जन तक पहुँचाया। आदि गुरू शंकराचार्य ने मानव मात्र में एकात्मता का उदघोष किया। उन्होंने संदेश दिया कि मानव मात्र सहित प्रत्येक जीव में एक ही चेतना है और हम सब एक ही परमात्मा की संतान हैं।

श्री चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व के कल्याण की बात कहती है। जब सभी प्राणियों में एक ही आत्मा है तो जातिवाद, संप्रदायवाद व क्षेत्रवाद जैसी बातों का कोई अर्थ नहीं रह जाता। हमारी संस्कृति कहती है कि पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों में भी एक ही चेतना और ईश्वर का वास है।

मुख्यमंत्री ने कहा सरकार का काम केवल सड़क, अस्पताल व अन्य निर्माण कार्य नहीं, बल्कि इंसान की जिंदगी बनाना भी होता है। सरकार द्वारा ओंकारेश्वर में अद्वैतवाद के प्रणेता आदि गुरू शंकराचाय की 108 फीट की अष्टधातु की प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसमें इस उद्देश्य को लेकर एकात्म यात्रा निकाली जा रही है।

श्री चौहान ने कहा आदि गुरू शंकराचार्य की प्रतिमा भारत ही नहीं पूरी दुनिया को शांति, एकता व भाईचारा का संदेश देगी। उन्होंने कहा कि एकात्म यात्रा 22 जनवरी को ओंकारेश्वर पहुँचेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ओंकारेश्वर में अद्वैत वेदांत की स्थापना होगी। साथ ही सांस्कृतिक एकता न्यास भी बनाया जायेगा।

महामण्डलेश्वर स्वामी परमानंद जी महाराज ने अपने आशीर्वचन देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की रचना किसी एक समुदाय या धर्म से नहीं हुई है, बल्कि इसके रचनाकार सर्वसमाज के लोग हैं। उन्होंने कहा जब तक हम एक होकर नहीं रहेंगे, तब तक समाज व संविधान की रक्षा नहीं कर पायेंगे। स्वामी परमानंद जी ने कहा कि आदि गुरू शंकराचार्य मध्यप्रदेश की धरती पर 8 वर्ष की अल्प आयु में पहुँचे थे और ओंकारेश्वर में उन्होंने तत्व ज्ञान प्राप्त किया।

महामण्डलेश्वर राधे-राधे महाराज ने कहा कि पहले एकात्मता का भाव जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से एकात्म यात्रा मुख्यमंत्री की सराहनीय पहल है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने एकात्म यात्रा में आईं आदि गुरू शंकराचार्य की पादुकाओं एवं यात्रा कलश का सपत्नीक पूजन किया। कन्या पूजन एवं पादपृच्छालन कर संतजनों से आशीर्वाद लिया तथा संतजनों का अभिनंदन किया।

ग्वालियर में “एकात्म यात्रा” के साथ आईं पादुकाओं को श्री जयभान सिंह पवैया अपने सिर पर धारण कर संवाद कार्यक्रम स्थल पहुँचे। ग्वालियर शहर के सभी 66 वार्डों और जिले के ग्रामीण अंचल से भी उपयात्रायें निकलीं।