मिनिमम बैलेंस को लेकर SBI दे सकता है राहत

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सरकार के दबाव में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) मिनिमम बैलेंस में राहत दे सकता है। शहरी ब्रान्च में अभी मिनिमम बैलेंस की सीमा 3000 रुपये है। बैंक मासिक औसत बैलेंस की जरूरत को तिमाही औसत बैलेंस में बदलने की तैयारी में भी है। यानी ग्राहकों को हर महीने की बजाय तिमाही पर अपने अकाउंट में निर्धारित बैलेंस मेंनटेन करना होगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब यह रिपोर्ट सामने आई है कि बैंक ने अप्रैल और नवंबर 2017 के बीच मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करने की वजह से ग्राहकों से 1,772 करोड़ रुपये जुर्मना वसूला।

सूत्रों के मुताबिक, बैंक मिनिमम बैलेंस की जरूरत को करीब 1000 रुपये किया जा सकता है, लेकिन अभी इस पर फैसला होना बाकी है। SBI ने जून में मिनिमम बैलेंस को बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया था। हालांकि, विरोध के बाद मिनिमम बैलेंस सीमा को मेट्रो शहरों में घटाकर 3000, सेमी-अर्बन में 2000 और ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 रुपये किया गया था। तब नाबालिग और पेंशनर्स के लिए भी इस सीमा को कम कर दिया गया था। पेनल्टी को 25-100 रुपये से घटाकर 20-50 रुपये के रेंज में लाया गया था।

बैंक के अधिकारियों ने कहा कि इस बारे में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि सूत्रों ने बताया कि बैंक दरों में कटौती के बाद इसके असर की गणना कर रहा है।

मासिक की बजाय तिमाही बैलेंस के नियम से उन लोगों को फायदा होगा जिनके अकाउंट में किसी महीने कैश की कमी हो जाती है, लेकिन अगले महीने वह कैश जमा भी कर देते हैं।

हालांकि, एसबीआई में मिनिमम बैलेंस की सीमा दूसरे पब्लिक सेक्टर बैंकों से अधिक और बड़े प्राइवेट बैंक्स से कम है। उदाहरण के तौर पर आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, कोटक और एक्सिस बैंक के मेट्रो अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस सीमा 10 हजार रुपये है।