सूर्य नमस्कार से शरीर स्वस्थ्य और मन प्रसन्न रहता है – मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र

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दतिया  – ईपत्रकार.कॉम |स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इस दिन सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। जिसके माध्यम से युवाओं को शरीर को स्वस्थ्य और वलिष्ठ रखने तथा सामूहिक व्यायाम की शिक्षा मिलती है। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जिले में सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। मुख्य समारोह हाई स्कूल क्रमांक 1 प्रांगण में सम्पन्न हुआ। जहां पर मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन, जनसम्पर्क एवं संसदीय कार्य विभाग मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र मौजूद रहे। उन्होंने सूर्य नमस्कार के तीनों चक्रों में योगा अभ्यास किया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का संदेश प्रसारित किया गया। जनसम्पर्क मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि सूर्य नमस्कार भारतीय योग परंपरा का हिस्सा है। इसके द्वारा न केवल शरीर चुस्त-दुरूस्त रहता है बल्कि शरीर में ऊर्जा का संचार भी होता है। इस दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष श्री विक्रम सिंह बुन्देला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रजनी प्रजापति, कलेक्टर श्री मदन कुमार, संयुक्त कलेक्टर श्री विवेक रघुवंशी, डिप्टी कलेक्टर श्री वीरेनद्र कटारे के अलावा सर्वश्री सुभाष अग्रवाल, योगेश सक्सैना, विनय यादव, प्रशांत ढेंगुला, जीतू कमरिया, जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि व स्कूली छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

क्या है सूर्य नमस्कार

सामूहिक सूर्य नमस्कार के लिए 1 से 12 स्थितियां निर्धारित है। सूर्य नमस्कार भारतीय योग परम्परा का अभिन्न अंग है। यह विभिन्न आसन और प्राणायाम का समन्वय है। जिससे शरीर के सभी अंगो, उपांगों का पूर्ण व्यायाम होता है। या यूं कहें कि मानव शरीर के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के लिए योग व प्रणायाम दोनो अति महत्वपूर्ण है।

पहला आसन प्रार्थना मुद्राः- प्रार्थना मुद्रा एकाग्र एवं शांत अवस्था में लाता है तथा रक्त संचार को सामान्य करता है।

दूसरा आसन हस्त उक्तानासनः- यह आसन उदर की अतिरिक्त चर्बी को हटता है और पाचन को सुधरता है। इससे फेफडे मजबूत होते और भुजाओं व कंधों की मॉसपेशियों का व्यायाम होता है।

तीसरा आसन पद हस्तनासनः- यह आसन पेट व आमाशय के दोषों को दूर करता है। कब्ज को हटाने में सहायक होकर रोडी को लचीला बनाता है।

चौथा आसन अश्व संचालनासनः- उदर के अंगों की मालिक कर कार्य प्रणाली को सुधारता है। जिससे पैरों की मॉसपेशियों को शक्ति मिलती है।

पांचवा आसन पर्वतासनः- भुजाओं एवं पैरों स्नाईयौ एवं मॉस पेशियों को शक्ति प्रदान करता है। मस्तिष्क को क्रियाशील बनाता है।

छटा आसन अष्टांग नमस्कारः- यह आसन पैरों और भुजाओं की मॉसपेशियों को शक्ति प्रदान करने के साथ ही सीने को भी विकसित करता हे।

सांतवा आसन भुजंगासन:- यह आसन पेट संबंधी रोगों को ठीक करने में उपयोगी है। साथ ही रीढ़ के प्रमुख स्नाईयौ को नई शक्ति प्रदान करता है। सूर्य नमस्कार में 12 स्थितियां होती है। शेष पांच स्थितियां क्रमशः पर्वतासन, अश्व संचानासन पाद हस्तआसन, हस्त उत्तानासन एवं प्रार्थना की मुद्राओं को दोहराव है।
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