68वां गणतंत्र दिवस आज, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इंडिया गेट पर फहराया तिरंगा

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नई दिल्ली: देश आज अपना 68वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मना रहा है। इस दौरान सुबह 10 बजे राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तिरंगा फहराकर कार्यक्रम की शुरुआत की। करीब 90 मिनट तक चले परेड में सबसे खास बात यह थी कि 32 साल में पहली बार इसमें एनएसजी कमांडो को शामिल किया गया जिसने सबका ध्‍यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। अबु धाबी के शहजादे मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि थे।
राजपथ पर देश की सैन्य ताकत देखने को मिली
अड़सठवें गणतंत्र दिवस के मौके पर आज राजपथ पर देश की सैन्य ताकत, प्रौद्योगिकी और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।  परेड में कुल 23 झाकियां, सैन्य बलों, अद्र्धसैनिक बलों, एनसीसी, एनएसएस तथा एनएसजी के 15 मार्चिंग दस्ते, संयुक्त अरब अमीरात का एक मार्चिंग दस्ता तथा उनके बैंडों ने हिस्सा लिया। स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस और देश में ही बनी धनुष तोप, कोर ऑफ मिलिट्री पुलिस के ‘श्वेत अश्व’ द्वारा मोटरसाइकिल पर हैरतंगेज कर देने वाले करतब तथा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडो परेड का मुख्य आकर्षण रहे।  राजधानी में आज मौसम सुहावना बना रहा।

मौसम का लुत्फ उठाते हुए पूरे उत्साह के लोगों ने परेड का आनंद लिया
आसमान में बादल छाये रहे और हल्की बूंदाबांदी भी हुई लेकिन इससे परेड पर कोई असर नहीं पड़ा और लोगों ने मौसम का लुत्फ उठाते हुए पूरे उत्साह के साथ परेड का आनंद लिया।  समारोह की शुरुआत इंडिया गेट स्थित अमर जवान ज्योति पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने भी तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ शहीदों को अपनी श्रद्धांजलि दी।

21 तोपों की सलामी के साथ परेड शुरू  हुई
इसके बाद प्रधानमंत्री ने सलामी मंच पर आकर तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर और राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की अगवानी की। उनके सम्मान में 21 तोपों की सलामी के साथ ही सुबह 10 परेड शुरू हो गई। राष्ट्रपति के साथ आबूधाबी के युवराज एवं संयुक्त अरब अमीरात की सशस्त्र सेनाओं के डिप्टी सुप्रीम कमांडर मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान भी थे जो इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि थे।  दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांङ्क्षडग लेफ्टिनेंट जनरल एम.एम. नरवाने परेड कमांडर तथा दिल्ली क्षेत्र के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल राजेश सहाय परेड के सेकेंड इन कमांड थे।

राजपथ पर ऐतिहासिक धरोहरों का झरोखा देखने को मिला
विजय चौक और इंडिया गेट को जोडऩे वाले राजपथ पर लगभग डेढ़ घंटे तक तीनों सेनाओं की ताकत, राष्ट्र की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक धरोहरों का झरोखा देखने को मिला। परेड का समापन आठ किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद लाल किले पर हुआ।  थल सेना के छह मार्चिंग दस्तों तथा छह बैंडों, नौसेना के एक-एक बैंड और मार्चिंग दस्ते तथा एक झांकी और वायु सेना के मार्चिंग दस्ते, बैंड तथा वाहनों की एक टुकड़ी ने परेड में हिस्सा लिया। इसके अलावा बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ तथा दिल्ली पुलिस के एक-एक बैंड और मार्चिंग दस्ते, तटरक्षक बल का एक मार्चिंग दस्ता तथा एनसीसी के बालकों और बालिकाओं का एक-एक मार्चिंग दस्ता भी परेड में शामिल हुआ।

धनुष को पहली बार सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया गया
मार्चिंग दस्तों से पहले स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस और देश में ही बनी धनुष तोप ने राजपथ के दोनों और मौजूद दर्शकों और अतिथियों की तालियां बटोरी। धनुष को पहली बार सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया गया है। इसे भारतीय सेना के लिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि बोफोर्स तोप के बाद सेना को मिलने वाली यह पहली बड़ी तोप है। इतना ही नहीं टी-90 टैंक, आकाश और ब्रह्मोस मिसाइल, सीबीआरएन यानी कैमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लिअर रेडिएशन डिटेक्शन मशीन भी राजपथ पर नजर आए।  वायु सेना की स्वदेशी ताकत का प्रतीक लड़ाकू विमान तेजस भी पहली बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बना। लगभग दो दशक के अंतराल के बाद यह दूसरा मौका है जब कोई स्वदेशी लड़ाकू विमान राजपथ पर वायु सेना की स्वदेशी ताकत राजपथ पर दिखी।

1980 के दशक में लड़ाकू विमान दिखाए थे अपने जौहर 
इससे पहले 1980 के दशक में स्वदेशी लड़ाकू विमान मारुत ने गणतंत्र दिवस परेड के मौके पर फ्लाई पास्ट में अपने जौहर दिखाए थे।  हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा बनाया गया तेजस ऑटो पायलट सुविधा के साथ घातक मिसाइलों, बमों और अन्य हथियारों से लैस अत्याधुनिक विमान है। फ्लाई पास्ट के लिए तीन तेजस विमानों ने बीकानेर के निकट नाल हवाई पट्टी से उड़ान भरी थी।  वायु सेना की मारक क्षमता की रीढ़ माने जाने वाले सुखोई, जगुआर और मिग लड़ाकू विमानों ने भी फ्लाई पास्ट में अपने जौहर दिखाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर लिया। लड़ाकू हेलिकॉप्टर रुद्र तथा उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर ध्रुव के अलावा भारी-भरकम मालवाहक विमान हरक्यूलिस और ग्लोबमास्टर भी फ्लाई पास्ट का हिस्सा रहे।  वायु सेना के दस्ते में इस बार चार अधिकारी और 144 आसमानी योद्धा शामिल थे। दस्ते का नेतृत्व स्क्वॉड्रन लीडर अटल सिंह शेखों ने किया। वायु सेना की झाँकी का थीम इस बार महिला पायलटों को लड़ाकू भूमिका में शामिल करने और वायु सेना के प्रौद्योगिकी केन्द्रीत नेटवर्क पर आधारित था।