नर्मदा किनारे के गाँवों में शराब दुकानें बंद करने के निर्णय का हुआ स्वागत

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नर्मदा तट पर शराब की दुकानें बंद करने के सरकार के निर्णय का नर्मदा किनारे के गाँव के लोगों विशेष रूप से महिलाओं ने भरपूर स्वागत किया है। ‘नमामि देवी नर्मदे”-सेवा यात्रा में शामिल हो रहे लोगों ने कहा कि यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का क्रांतिकारी कदम है। नर्मदा नदी के किनारे बसे 16 जिलों के गाँवों में सामाजिक बदलाव लाने में यह निर्णय मील का पत्थर साबित होगा।

नर्मदा सेवा यात्रा 37 दिन होशंगाबाद के डोंगरवाड़ा, हासलपुर, रूंढाल, ताल नगरी, खोकसर और खरखेड़ी पहुँची तो नशाबंदी के निर्णय को लेकर लोगों में उत्साह था। रूंढाल ग्राम पंचायत की सरपंच चंपाबाई कहती है कि कि नशा हर बुराई की जड़ है और इसे जड़ से ही मिटाना होगा क्योंकि नशे की आदत कभी भी लग जाती है और फिर छूटती नहीं। नर्मदा के किनारे शराब की दुकान बंद होने से पूरे प्रदेश में सामाजिक बदलाव लाने की शुरूआत होगी।

तालनगरी ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती माया बाई बताती हैं कि यहाँ से 10 किलोमीटर दूर चावलखेड़ा में शराब की दुकान है। गाँव के लोग वहाँ से शराब आसानी से प्राप्त कर लेते हैं। अब मुख्यमंत्री के निर्णय से दुकान बंद हो जाएगी। गाँव वालों के लिए बहुत अच्छी बात है।

होशंगाबाद जिले से चार किलोमीटर दूर डोंगरवाड़ा ग्राम पंचायत को नशामुक्त ग्राम बनाने के लिए महिलाओं ने संकल्प लिया है। यहाँ की महिलाओं ने दो साल पहले नशा मुक्ति अभियान शुरू किया था। उन्होंने मिलकर दुर्गा नारी नशामुक्ति जागृति समिति बनाई थी। यहाँ की सरपंच सरोज बाई बताती हैं कि जो भी पुरुष नशे में दिखाई देता था उसे पहले समझाते थे। यदि नहीं मानता था तो उसकी पिटाई भी महिलाएँ करती थी। ऐसे व्यक्ति के घर वाले भी विरोध नहीं करते थे। अभी काफी फर्क आया है लेकिन चोरी छिपे अभी भी नशा कर कर रहे हैं। अच्छी बात यह हुई कि गाँव में शराब आना बंद हो गई है।

इस समिति की सबसे सक्रिय सदस्य हैं 60 वर्षीय कृष्णाबाई धुर्वे। उन्होंने नशे की लत के कारण अपने पति और बच्चों को खो दिया है। वह कहती हैं कि इस समिति की सदस्य महिलाएँ हमेशा चौकस रहती हैं। मुख्यमंत्री के शराबबंदी के निर्णय पर खुशी जाहिर करते हुए वे कहती हैं कि शराब की दुकानें बंद करने से पुण्य का काम हो रहा है। यह जिंदगी बचाने का काम है। अब नई उम्र के बच्चों को नशे से बचाना पड़ेगा।

इसी गाँव की एक अन्य महिला निर्मला केवट मुख्यमंत्री के निर्णय की तारीफ करते हुए कहती हैं कि पूरे प्रदेश में इसे लागू करना चाहिए। वे कहती हैं कि नशे से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं हो सकती। वे बताती है कि उनके पति मनोहर केवट नशे के आदी हो चुके थे लेकिन पिछले एक साल से नशे से दूर है। बेटे नितेश केवट पर भी बुरा असर पड़ रहा था।

समिति के काम करने के तरीके के सम्बन्ध में वे बताती हैं कि गाँव में जब पता चलता है कि कोई नशे में है तो महिलाएँ मिलकर उसके पास जाती हैं और पूछती हैं कि उसे किसने दी। बेचने वालों की पिटाई तक हो जाती है। धीरे-धीरे शराब बेचने वाले इस गाँव में आने से डरने लगे हैं। मुख्यमंत्री जी के नशामुक्ति के संकल्प से हौसला बढ़ा है। अब नशामुक्ति का अभियान और तेज करने की कोशिश करेंगे।

इसी गाँव की अलका राजपूत अपने पति सुभाष राजपूत को नशे की लत से छुड़ाने के लिए समिति में आई थी। अब उनकी हालत में काफी सुधार है। उनकी बेटी अंचल राजपूत बारहवीं कक्षा में है और बेटा अंकित नौवीं कक्षा में पढ़ रहा है। अंचल राजपूत मुख्यमंत्री के शराबबंदी के निर्णय को लेकर उत्साहित हैं और कहती हैं कि आसानी से शराब मिलने पर नशा करने वालों की संख्या भी बढ़ रही थी। उन्हें विश्वास है कि शराब की दुकानें बंद होने से आस-पास के गाँव पूरी तरह से नशा मुक्त हो जाएंगे।