साथ-साथ नहीं बह सकते खून और पानी

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पाकिस्तान की नापाक हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत हर विकल्प पर विचार कर रहा है. सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु नदी के पानी के समझौते को लेकर समीक्षा बैठक की. इस बैठक में पीएम ने अधिकारियों से कहा कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते. हम समझौते पर पुनर्विचार करने के लिए गंभीर हैं.

पीएम ने कहा कि अब तक पाक के साथ 112 बैठकें हो चुकी हैं. अब आतंक के माहौल में बातचीत नहीं की जा सकती. अधिकारियों ने कहा कि बिना समझौता तोड़े भी भारत अपने हिस्से का पानी ले सकता हैं. प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई मीटिंग में वाटर रिसोर्सेज मंत्रालय के सेक्रेटरी ने एक प्रजेंटेशन दिया, जिसमें कहा गया कि बिना समझौते को तोड़े बिना हम जो अपने हिस्से का ज्यादा पानी पाकिस्तान को दे रहे हैं, उसको रोका जा सकता है. मीटिंग में यह भी कहा गया कि 3.6 मिलियन एकड़ फीट वाटर स्टोरेज पर भारत का हक है. यह पानी हम पाकिस्तान को ज्यादा देर रहे थे, जो कि हम हम रोक सकते हैं. जिससे 6 लाख हेक्टर लैंड में सिंचाई हो सकेगी.

बिजली की समस्या होगी दूर
इस पानी से 18000 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा सकता है. फिलहाल 3 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है. इससे जम्मू-कश्मीर में बिजली और सिंचाई की समस्या खत्म हो जाएगी.

पीएम ने किया समझौते का रिव्यू
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधु जल समझौते को लेकर विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय और जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग की, जिसमें प्रधानमंत्री ने जानकारी ली की कैसे सिंधु जल समझौता रिव्यू किया जा सकता है, जो समझौता 1960 मे हुआ था. किस ढंग से पाकिस्तान के साथ एग्रीमेंट किया गया था. इन तमाम चीजों पहलुओं के बारे में प्रधानमंत्री ने जानकारी ली. बैठक में प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजीत डोभाल, विदेश सचिव जयशंकर और वाटर रिर्सोसेस मंत्रालय के सचिव भी मौजूद थे.

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