नॉर्थ ईस्ट को डिस्टर्ब रखना चाहते हैं पाक और चीन- बिपिन रावत

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आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि देश के उत्तर पूर्व में बाहर से अवैध आबादी आने के पीछे प्रॉक्सी ऐंगल है, जिसकी योजना पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) ने बनाई है और उसे उत्तरी पड़ोसी (चीन) का समर्थन हासिल है। वे हमेशा सुनिश्चित करना चाहेंगे कि इलाके में प्रॉक्सी युद्ध लड़ा जाए। देश के उत्तर पूर्व में सीमा सुरक्षा को लेकर बुधवार को राजधानी में हुए एक सेमिनार में आर्मी चीफ ने कहा कि जब सामने ज्यादा मजबूत देश हो और उससे परंपरागत तरीके से नहीं निपटा जा सकता है तो प्रॉक्सी तरीका अपनाया जाता है।

गौरतलब है कि कश्मीर पर जंग की जगह इस एरिया को डिस्टर्ब रखने के लिए पाकिस्तान से आतंकवादी भेजे जाते रहे हैं। नॉर्थ ईस्ट में भी पाकिस्तान के इसी प्लान की ओर इशारा करते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि वहां पश्चिमी पड़ोसी यह गेम अच्छी तरह खेल रहा है। इस इलाके को डिस्टर्ब रखने के लिए अवैध आबादी भेजी जाती रहेगी। इस समस्या के पीछे वोट बैंक की राजनीति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि वहां एयूडीफ नाम के राजनीतिक संगठन को देखना होगा। उसका बीजेपी के मुकाबले तेजी से विकास हुआ है। जनसंघ से लेकर बीजेपी का आज तक का सफर जितना लंबा रहा है, उसके मुकाबले एयूडीएफ का तेजी से विस्तार हुआ है। गौरतलब है कि असम में एयूडीएफ मुस्लिमों के मुद्दे उठाती रही है, जिन्हें बड़ी संख्या में बांग्लादेश से आया समझा जाता है।

उत्तर पूर्व में बांग्लादेश से लोगों के आने की बात पर आर्मी चीफ ने कहा कि मानव विकास के इंडेक्स में बांग्लादेश भले ही हमसे आगे हो, लेकिन वहां से आबादी आती रहेगी, क्योंकि वहां बाढ़ के कारण जमीन की कमी होती है। उन्होंने कहा, ‘मैं नहीं समझता हूं कि उत्तर पूर्व में आबादी का स्वरूप बदला जा सकता है। हमें सभी लोगों के साथ मिलकर रहना सीखना होगा, चाहे वे किसी जाति, धर्म, लिंग आदि से हों। अगर हम लोगों को अलग करने लगे तो समस्या बढ़ेगी। जो लोग समस्या पैदा कर रहे हैं उनकी पहचान करनी होगी, लेकिन यह समझना होगा कि वहां मुस्लिम बाद में नहीं, शुरुआत में आने वालों में थे।’

आर्मी चीफ ने कहा, ‘हमें वहां विकास की जरूरतों को पूरा करने के साथ लोगों को जोड़ना होगा। सरकार विकास का ध्यान रख रही है, लेकिन मैं आज सद्भावना यात्रा पर मणिपुर से आए बच्चों से मिला। वे कल दिल्ली के आसपास घूमने गए थे, जहां उन्हें विदेशी समझा गया। उत्तर पूर्व के लोगों की पहचान की समस्या है, जबकि वे हमारे देश का हिस्सा हैं।’ उन्हें कैसे जोड़ा जा सकता है, इस पर एक पुराना वाकया याद करते हुए आर्मी चीफ ने बताया,’उत्तर पूर्व में मैं एक बार अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय आबादी से मिलने गया था तो एक शख्स से मैंने सांकेतिक भाषा में बातचीत की। 3-4 मिनट के बाद वह शख्स बोला- क्या आप हिंदी जानते हो। इसके बाद हिंदी में बातचीत हुई।’

डोकलाम पर चिंता की कोई बात नहीं
डोकलाम विवाद के दौरान चर्चा में आए सिलिगुड़ी कॉरिडोर का जिक्र करते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि इस पर खतरे का ख्याल रखा जा सकता है, लेकिन हमें उत्तर पूर्व की समस्याओं को समग्रता में देखना होगा। गौरतलब है कि डोकलाम इलाके से भारत के सिलिगुड़ी कॉरिडोर की दूरी काफी कम है, जो नॉर्थ ईस्ट को भारत के शेष इलाकों से जोड़ता है। कहा जाता है कि डोकलाम के जरिये चीन की नजर सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर है, जिससे वह नॉर्थ ईस्ट के कई इलाकों को हासिल करने का सपना रखता है। डोकलाम की मौजूदा स्थिति को ठीक बताते हुए आर्मी चीफ ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है। कॉन्फ्रेंस में नेवी चीफ सुनील लांबा ने कहा कि एलएसी पर चीनी सेना के उल्लंघन के वाकये और डोकलाम का गतिरोध चीन के मुखर होने का संकेत है, क्योंकि वह आर्थिक और सैन्य दोनों तरह से तरक्की कर रहा है। हालिया घटनाक्रम ने सिलिगुड़ी कॉरिडोर पर खतरा दिखाया है।

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