सुप्रीमों मायावती ने लखनऊ में आज जयवीर सिंह व इंद्रजीत सरोज की बगावती तेवरों से हुए नुकसान की भरपाई करने व संगठन के तार कसने को बसपा मुखिया प्रमुख पदाधिकारियों के साथ मासिक समीक्षा बैठक की।
बसपा के उत्तर प्रदेश स्टेट कार्यालय में आयोजित इस बैठक में ‘बीएसपी का सपना सरकार हो अपना’ मूवमेंट के लिए पूरे तन, मन, धन से काम करने और इसे जारी रखने के लिए बसपा कार्यकर्ताओं ने शपथ ली।
मायावती ने कहा कि साथ ही, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों को भी हर प्रकार से भयभीत व आतंकित करके उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक जैसा जीवन व्यतीत करने का माहौल बनाया जा रहा है, जिसके विरूद्ध भी संर्घष ज़रूरी। परन्तु अम्बेडकरवादी लोगों के संकल्पों को इन्हें कभी भी झुकाया या खत्म नहीं किया जा सकता है, यह पूरा देश जानता है।
बीजेपी की सरकार द्वारा शहरों, स्टेशनों, सड़कों आदि का नाम बदला जाना भी इनकी संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व फासीवादी सोच का परिणाम है जबकि बीएसपी की सरकारों में नये ज़िले, नये तहसील, नये संस्थान, पार्क व स्थल आदि बनाकर उनका नया सुन्दर नामकरण किया।
सूत्रों का कहना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बाद इंद्रजीत सरोज की बगावत को लेकर पार्टी बेहद गंभीर है क्योंकि स्वामी प्रसाद के बगावती तेवरों से बसपा को पिछड़े वर्ग की वोटों का नुकसान उठाना पड़ा था।
इसी तरह से पार्टी का मुस्लिम चेहरा माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी की बगावत से मुस्लिम-दलित समीकरण प्रभावित होने की आशंका बढ़ी थी। मुसलमानों और पिछड़ों में हुए नुकसान की भरपाई अब तक न हो सकी थी कि इंद्रजीत सरोज का झटका लगा। पूर्व मंत्री आरके चौधरी के बाद पासी समाज में इंद्रजीत सरोज को असरदार नेता माना जाता है। इंद्रजीत 13 अगस्त से बसपा विरोधी मोर्चा बनाने का एलान कर चुके है।


































































