मैं देश के लिए रजत पदक जीतने में सफल रही-सिंधू

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मैं इस बार अपने पदक का रंग जरूरी बदलूंगी। यही कहा था पीवी सिंधू ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में जाने से पहले। हालांकि साइना नेहवाल की तरह वह भी पहली भारतीय विश्व चैंपियन बनने से एक कदम दूर रह गईं, लेकिन रजत पदक जीतकर उन्होंने अपना वादा जरूर पूरा कर दिया।

जापानी खिलाड़ी नोजोमी ओकुहारा के खिलाफ फाइनल में टूर्नामेंट का सबसे लंबा मैच (एक घंटा, 49 मिनट) खेलने के बाद सिंधू ने माना कि यह काफी थका देने वाला मुकाबला था। उन्होंने कहा, ‘यह मानसिक और शारीरिक तौर पर काफी कड़ा मैच था। प्रत्येक रैली लंबी खिंची और हम दोनों में से किसी ने भी ढिलाई नहीं बरती और कड़ी चुनौती पेश की। यह काफी करीबी रहा। हम 14-14, 18-18 जैसे स्कोर पर आगे बढ़ रहे थे और 20-20 के स्कोर पर कोई भी विजेता बन सकता था। यह बड़ा मैच था। एक अच्छा मैच था, लेकिन दुर्भाग्य से मैं नहीं जीत सकी। कुल मिलाकर चैंपियनशिप में भारतीयों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। हम भारतीय बहुत गौरवान्वित हैं कि हमने दो पदक जीते। साइना ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। मुझे बहुत गर्व है कि मैं देश के लिए रजत पदक जीतने में सफल रही। इससे मुझे काफी आत्मविश्वास मिला है और मैं भविष्य में और खिताब जीतूंगी।

विश्व चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी सिंधू ने कहा कि प्रारूप और स्कोरिंग प्रणाली में बदलाव की कोई जरूरत नहीं है। मुझे लगता है कि 21 अंक की प्रणाली अच्छी है। इसमें लंबी रैलियां देखने को मिलेंगी। इसे 30-40 मिनट तक सीमित रखना संभव नहीं होगा, क्योंकि यह विश्व चैंपियनशिप है। प्रत्येक विश्वस्तरीय खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेता है।

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