पैरा पावरलिफ्टर सचिन चौधरी ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों की कड़वी यादों से उबरते हुए मंगलवार को गोल्ड कोस्ट में पुरूषों के हेवीवेट फाइनल में कांस्य पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में पैरा-स्पोट्र्स में भारत को पहला पदक दिलाया। करारा स्पोट्र्स एरेना में दस खिलाड़ियों के फाइनल में चौधरी ने कुल 181 किग्रा भार उठाकर कांस्य पदक जीता।
वहीं नाइजीरिया के अब्दुल अजीज इब्राहिम (191.9 किग्रा) ने स्वर्ण जबकि मलेशिया के यी खी जोंगे (188.7 किग्रा) ने रजत पदक जीता। चौधरी ने पिछले साल दुबई में पावरलिफ्टिंग विश्व कप में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ 200 किग्रा भार उठाकर रजत पदक जीता था। वह 2012 पैरा ओलिंपिक में नौवें स्थान पर रहे थे। पिछला राष्ट्रमंडल खेल उनके लिए कड़वे सफर जैसा था जहां पिता के खराब स्वास्थ्य के कारण वह खेल में हिस्सा लिए बिना स्वदेश लौट गए थे।
फिर बाद में यह भी खबर आई कि वह 2014 के जून में प्रतियोगिता से इतर डोपिंग टेस्ट में नाकाम हुए थे। इसके बाद उनपर दो साल का प्रतिबंध लगा दिया गया। पदक जीतने के बाद उत्साहित चौधरी ने कहा, ‘भारत में राष्ट्रमंडल खेलों को सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में से एक माना जाता है। यह मेरे लिए जीवन बदलने वाला क्षण है।’उन्होंने कहा, ‘स्पर्धा के दौरान मैं हर समय संयम से भरा था। मुझे यकीन था कि मैं आज पदक जीतने में सफल रहूंगा।’






























































