NSG में भारत विरोध के आरोप से बचना चाहता है चीन, कहा- बदनाम न करें

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परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत के शामिल होने की राह में रोड़े बने चीन अब इस आरोप से भी किनारा करना चाहता है. अपनी कोशिशों के लिए शर्मिंदगी जैसा महसूस करते हुए चीन ने भारत से इस मामले में गलत मतलब नहीं निकालने के लिए कहा है. चीन ने कहा है कि इस मसले में भारत उसे बदनाम न करे.

एनएसजी के लिए ज्यादा कोशिश करे भारत
चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने इस बारे में एक संपादकीय लिखा है. संपादकीय में उसने लिखा है कि भारत को चीजों की गलत व्याख्या और चीन को बदनाम करने के बजाय इस मामले में अंतरराष्ट्रीय समर्थन पाने के लिए अभी और कोशिश करनी चाहिए. संपादकीय में भारतीय नागरिक और मीडिया दोनों पर निशाना साधा गया है.

भारत विरोध और पाक समर्थक छवि से चीन दुखी
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि सोल में एनएसजी की बड़ी बैठक में भारत की सदस्यता को लेकर जो नतीजे आए उसे भारतीय नागरिक स्वीकार नहीं करना चाहते. ज्यादातर भारतीय मीडिया में चीन पर आरोप लगाया गया है कि उसने भारत की सदस्यता का विरोध किया. चीन को भारत का विरोधी और पाकिस्तान समर्थक बताया गया.

1962 के युद्ध की मानसिकता से उबरे भारत
ग्लोबल टाइम्स में सोमवार को छपे संपादकीय में लिखा है कि भारत अब भी चीन के साथ 1960 के दशक में हुए युद्ध की छाया से उबर नहीं पाया है. भारत उन धाराणाओं से बाहर निकलना चाहिए. इसमें कहा जाता है कि चीन उसकी प्रगति को बर्दाश्त नहीं करता. नई दिल्ली पेइचिंग को लेकर गलतफहमी में है. इसी वजह से दोनों देशों के बीच मतभेद हैं.

चीन-भारत मिलकर आर्थिक मोर्चे पर लड़ें
संपादकीय में लिखा गया है कि दोनों देशों को आपसी मदद बढ़ाना चाहिए. चीन भारत को राजनीतिक संदर्भ में नहीं देखता बल्कि वह इससे ज्यादा आर्थिक संदर्भ में देखता है. दोनों देशों को साथ मिलकर इसी मोर्चे पर काम करना चाहिए. चीन और भारत साथ मिलकर एशियाई देशों को बीच नई अंतरराष्ट्रीय लकीर खींच सकते हैं. भारत की तेज तरक्की को चीन से मदद मिल सकती है.

चीन ने कहा- 10 और देशों ने किया था भारत का विरोध
बीते सप्ताह भी ग्लोबल टाइम्स ने इन भारत के लोगों और यहां की मीडिया पर जमकर निशाना साधा था. ग्लोबल टाइम्स ने बताया था कि चीन साउथ कोरिया की राजधानी सोल में एनएसजी की बैठक में भारत का विरोध क्यों कर रहा था. इसमें कहा गया था कि अकेले चीन ही नहीं बल्कि 10 और देश भारत की सदस्यता का विरोध कर रहे थे.

पहले भारत के राष्ट्रवादियों को दी थी नसीहत
इसी तरह पहले भी ग्लोबल टाइम्स ने भारतीयों और भारतीय मीडिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत के राष्ट्रवादियों को व्यवहार करना सीखना चाहिए. उसने लिखा था कि भारतीय लोग अपने देश को सुपर पावर बनते देखना चाहते हैं, लेकिन इन्हें यह नहीं पता है कि दुनिया की बड़ी ताकतें कैसे खेल खेलती हैं.

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