हाईटेक जमाने में श्राद्ध भी होने लगे हैं ऑनलाइन

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श्राद्ध पक्ष में पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पिंडदान और तर्पण की परंपरा वर्षों पुरानी हैं. हर राज्‍य की तरह मध्‍यप्रदेश के उज्जैन के सिद्धवट घाट पर भी श्राद्ध हो रहे हैं. लेकिन ये श्राद्ध इसलिए खास हैं क्‍योंकि ये हाइटेक हैं.

घाट पर बैठे पंडे अपने लैपटॉप पर ऑनलाइन मंत्र पढ़ते हैं तो यजमान घर में बैठकर श्राद्ध करते हैं. फिर पूजन की दक्षिणा भी यजमान ऑनलाइन ही पंडों के बैंक अकाउंट में डाल देते हैं. शायद आपको ये सब अटपटा लग रहा हो पर इस तरह काफी श्राद्ध यहां करवाए जा रहे हैं.

वैसे तो शास्त्रों में पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाला श्राद्ध यजमान द्वारा स्वयं तीर्थों में जाकर किए जाने का प्रावधान है. सालों से हर परिवार इस परंपरा का निभाता आया है लेकिन बदलते वक्त के साथ इसमें भी बदलाव हो रहे हैं.ऐसे कई परिवार हैं जो विदेश में रहने चले गए है लेकिन धार्मिक परंपरा में विश्वास रखते हैं या फिर बिजनेस या अन्य कामों की व्यस्तता के चलते तीर्थ पर नहीं आ पा रहे हैं और पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध करना चाहते हैं, उनके लिए यह लाभदायक सिद्ध हो रहा है. पंडित-पुरोहित, पूर्ण शास्त्रोक्त पद्धति को अपनाते हुए लैपटॉप के जरिए ऑनलाइन मंत्र पढ़कर यजमान को घर बैठे श्राद्ध करवा रहे हैं.

ऐसे होता है ऑनलाइन श्राद्ध
पंडित लैपटॉप ऑन कर ऑनलाइन मंत्र पढ़ते हैं और उधर यजमान अपने घर के पूजा वाले स्थान पर लैपटाप खोलकर बैठता है और पंडितों के बताए निर्देशानुसार पूजा विधि संपन्न करता है. पूजा शुरू करने से पहले बाकायदा फोन पर यजमान को एक बार पूरी विधि समझाई जाती है ताकि पूजा के दौरान उसे समझने में परेशानी न आए. कई लोगों ने तो श्राद्ध के लिए एडवांस बुकिंग भी करवा रखी है.

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