जम्मू-कश्मीर में सरकार ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल करने वालों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है. श्रीनगर के साइबर पुलिस स्टेशन ने सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल करने वालों पर UAPA कानून के तहत कार्रवाई की है. पुलिस की इस कार्रवाई पर सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने सवाल उठाए हैं. येचुरी ने कहा कि जब जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हो रहे हैं तो इंटरनेट के इस्तेमाल करने वालों पर गलत तरीके से कार्रवाई की जा रही है.
सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल करने वालों पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कार्रवाई की है और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने इस कार्रवाई के खिलाफ सरकार को निशाने पर लिया है. उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई से जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हो सकते.
येचुरी ने कहा, “इंटरनेट का इस्तेमाल लोगों का अधिकार है. सरकार अब इंटरनेट के इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. इससे वहां सामान्य हो रहे हालात को धक्का लगेगा. राजनेताओं को वहां जाने से रोका जा रहा है. सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने वालों पर गलत तरीके से कार्रवाई की जा रही है. ऐसी सरकार और उनकी सोच शर्मनाक है.”
कार्रवाई पर पुलिस ने क्या कहा?
उधर, जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि कश्मीर के मौजूदा हालात को देखते हुए सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिस पर एक्शन लिया गया और एफआईआर दर्ज की गई. इन पोस्ट में किसी विचारधारा को प्रमोट करना, आतंकियों की तारीफ करना जैसे पोस्ट को सीज़ किया गया है.
सूत्रों की मानें, तो जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने ये एक्शन स्थानीय पत्रकार कामरान युसूफ के पोस्ट के बाद लिया है. एक पोस्ट में कामरान युसूफ ने अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बारे में लिखा था, जिसमें कहा गया था कि वो ईदगाह में दफन होना चाहते हैं. इसी ट्वीट के बाद पत्रकार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था. खुलासा ये भी हुआ है कि कामरान युसूफ का नाम इससे पहले 2017 के टेरर फंडिंग केस में भी आ चुका है.
इस तरह के पोस्ट के अलावा कई ऐसे पोस्ट भी हैं, जिन्होंने अफवाह फैलाने का काम किया है. जिसमें आगरा जेल में बंद मियां कय्यूम को हार्ट अटैक आने की बात हो या कोई और मसला हो. इस दावे को भी बाद में पुलिस ने नकार दिया था.





























































