इस समय न खाएं पान, दरिद्रता और दुर्भाग्य में कटेगा जीवन

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सनातन धर्म में कोई भी शुभ काम किया जाए उसमें ताम्बूल अर्थात पान के पत्ते को जरूर रखा जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के वक्त देवताओं ने पान के पत्ते का प्रयोग कर पूजन किया था। पान खाना, दान करना और देवी-देवताओं को भेंट करना बहुत शुभ फलदायी होता है, लेकिन कुछ बातों का विशेष तौर पर ध्यान रखना चाहिए। सूर्यास्त के बाद पान का पत्ता, चूना और कत्था खाने से अपराध लगता है, दरिद्रता और दुर्भाग्य में जीवन कटता है। एकादशी और श्राद्ध के दिन पान नहीं खाना चाहिए।

टैंशन फ्री होने के लिए मंगलवार अथवा शनिवार को हनुमान जी को पान का बीड़ा चढ़ाएं, इस उपाय से संकटमोचन सदा के लिए आपका बीड़ा उठाएंगे। जिस व्यक्ति की रक्षा स्वयं हनुमान जी करेंगे, उसे कभी कष्ट हो नहीं सकता। इस उपाय से कभी भी शनि की टेढ़ी नजर आप पर नहीं पड़ेगी। हनुमान जी के लिए पान बनवाते समय उसमें कत्था, गुलकंद, सौंफ, खोपरे का बुरा और सुमन कतरी डलवाएं। ध्यान रखें पान में चूना, तंबाकू एवं सुपारी नहीं होनी चाहिए।

पापों से मुक्ति और अच्छे समय को निमंत्रण देने के लिए समय-समय पर पान का दान करते रहना चाहिए।

सोमवार के दिन भोले बाबा को कत्था, गुलकंद, सौंफ, खोपरे का बुरा और सुमन कतरी डाल कर पान चढ़ाएं। इससे घर में सुख और समृद्धि बढ़ती है तथा हर तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं।

रविवार को जेब में पान का पत्ता रखकर घर से निकलने पर बिगड़े काम बन जाएंगे।

सपने में स्वयं को पान खाता देखें तो समझ जाएं जल्दी आपके जीवन में कोई सुंदर स्त्री आने वाली है।

श्री राधाकृष्ण को मीठा पान बहुत भाता है। भगवान की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रतिदिन पान चढ़ाएं।

लक्ष्मी कृपा के लिए शुक्रवार को लक्ष्मी मंदिर में पान चढ़ाएं।

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