ग्वालियर- (ईपत्रकार.कॉम) |भौतिकता में डूबी दुनिया को साहित्य, संगीत व कलायें सही राह दिखाने का काम करती हैं। इसलिये कलायें केवल राज्याश्रित नहीं अपितु समाज आश्रित होना चाहिए। संस्कार भारती जैसी संस्थायें इस काम को बखूबी ढंग से अंजाम दे रही हैं। उक्त आशय के विचार केन्द्रीय पंचायतीराज, ग्रामीण विकास एवं खनन मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने व्यक्त किए। श्री तोमर संस्कार भारती संस्था द्वारा आयोजित हो रही तीन दिवसीय राष्ट्रीय विचार गोष्ठी एवं अखिल भारतीय साधारण सभा के द्वितीय दिवस के उदघाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। संस्कार भारती की मध्य प्रांत शाखा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने की।
यहाँ जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में कला दर्शन-संगीत सम्मेलन एवं अखिल भारतीय साधारण सभा में संस्कार भारती से जुड़े देशभर के लगभग 300 विद्वान एवं कला साधक भाग ले रहे हैं। उदघाटन सत्र में महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर, जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला, संस्कार भारती के संस्थापक सदस्य बाबा योगेन्द्र नाथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वासुदेव कामथ, राष्ट्रीय महामंत्री श्री विश्राम जामदार, प्रांतीय अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र प्रधान व अन्य अतिथिगण मंचासीन थे। इस अवसर पर राज्य सामान्य निर्धन वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री बालेन्दु शुक्ल भी मौजूद थे।
केन्द्रीय मंत्री श्री तोमर ने उदघाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा मुझे इस बात का गर्व है कि कला साधकों को एक मंच पर लाकर कलाओं को पोषित करने का काम संस्कार भारती कर रही है। उन्होंने कहा कला साधना में स्वार्थ की भावना नहीं अपितु समर्पण का भाव होता है। कला साधना से व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास होता है और कला साधक के मस्तक पर अलग ही तेज दिखाई देता है। श्री तोमर ने यह भी कहा कि ग्वालियर-चंबल अंचल की धरा संगीत, कला, साहित्य और स्थापत्य कला से समृद्ध है। उन्होंने ग्वालियर-चंबल अंचल के साहित्यकारों व कला मर्मज्ञों व वन संपदा की श्रृंखला पर प्रकाश डाला। साथ ही कहा कि ग्वालियर की धरती पर हुए विमर्श सदैव निष्कर्ष तक पहुँचते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा यहाँ की एक सभा में पहली बार एकात्म मानववाद का संदेश दिया था, जिसे अब पूरी दुनिया अपना रही हैं। केन्द्रीय मंत्री ने उम्मीद जाहिर की। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में निकले निष्कर्ष भी समाज के लिये उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय विचार गोष्ठी में भाग ले रहे विद्वानों से ग्वालियर-चंबल अंचल के पर्यटन स्थल का भ्रमण करने को भी कहा।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्रीमती माया सिंह ने कहा कि अधोसंरचना के काम कल पर छोड़े जा सकते हैं, मगर युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का काम कल पर नहीं छोड़ा जा सकता। वैश्वीकरण के इस भौतिकवादी युग में संस्कार भारती युवा पीढ़ी को संस्कारित करने का काम बखूबी ढंग से कर रही है। उन्होंने कहा संस्कार भारती कला गुरूओं के ज्ञान को नई पीढ़ी को हस्तांतरित कर राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दे रही है। फलत: भारतीय संस्कृति के मूल्य पल्लवित हो रहे हैं। श्रीमती माया सिंह ने कहा संस्कारों में गिरावट की वजह से ही महिला उत्पीड़न जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिये कला को बढ़ावा देने की जरूरत है।
महापौर श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने कहा कि ईश्वर प्राप्ति के लिये की जाने वाली तपस्या से कला मर्मज्ञों की साधना भी कमतर नहीं है। इसी भाव के साथ संस्कार भारती कला को बढ़ावा दे रही है। जीवाजी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा अगर शिक्षा में ज्ञान, व्यवहार व चरित्र का समावेश होगा तो देश में संस्कारवान पीढ़ी तैयार होगी।
इस अवसर पर बाबा योगेन्द्र नाथ सहित संस्कार भारती के अन्य पदाधिकारियों ने भी विचार व्यक्त किए। आरंभ में अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं माँ सरस्वती का पूजन कर उदघाटन सत्र का शुभारंभ किया। स्वागत उदबोधन श्री अशोक गोयल ने दिया। कार्यक्रम का संचालन श्री अशोक आनंद ने किया।

































































