गालिब की फनी शायरी

0

गालिब फरमाते हैं,

चली जाती हैं आए दिन वो ब्यूटी पार्लर में यूं

उनका मकसद है मिसाले-हूर हो जाना।

मगर ये बात किसी बेग़म की समझ में क्यूं नहीं आती,

कि मुमकिन ही नहीं किशमिश का फिर से अंगूर हो जाना।

Previous articleतुम्हारे फैसले की इज्जत करता हूं …
Next articleब्रेड, पराठों और खाने में घी या मक्खन खाने वाले हो जाएं सावधान !

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here