नई दिल्ली: सिक्किम से लगे डोकलाम इलाके में सीमा विवाद से तिलमिलाया चीन रोज नया पैंतरा दिखा रहा है। अब उसने जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच बातचीत की संभावना से इन्कार करते हुए कहा है कि फिलहाल इसके लिए सही माहौल नहीं है। भारत ने अपनी तरफ से मोदी और चिनफिंग के बीच मुलाकात के लिए वक्त नहीं मांगा था, लेकिन, कूटनीतिक गलियारों में इसकी तैयारियां चल रही थीं। जर्मनी के हैम्बर्ग शहर में शुक्रवार से जी-20 और ब्रिक्स देशों के प्रमुखों का सम्मेलन हो रहा है। वहां सम्मेलन से इतर मोदी और चिनफिंग के बीच मुलाकात की जमीन तैयार हो रही थी। इसे मौजूदा तनाव को खत्म करने के लिए अहम माना जा रहा था।
बृहस्पतिवार को चीन के विदेश मंत्रलय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देशों के प्रमुखों के बीच मुलाकात के लिए यह सही माहौल नहीं है। भारत जल्द-से-जल्द अपनी सेना चीन की सीमा से वापस बुला कर शांति स्थापित करने में मदद करे। आधिकारिक तौर पर भारत ने चीन के बयान को खास तवज्जो नहीं दिया है। विदेश मंत्रलय की तरफ से बताया गया है कि प्रधानमंत्री अर्जेटीना, कनाडा, इटली, मैक्सिको, ब्रिटेन, वियतनाम समेत आठ देशों के प्रमुखों से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। मोदी ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों की अलग से होने वाली मुलाकात में भी हिस्सा लेंगे। इनके अलावा उनकी अलग से किसी राष्ट्राध्यक्ष से मिलने की योजना नहीं है।
कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि मोदी और चिनफिंग के बीच गैर आधिकारिक तौर पर मुलाकात की संभावना से अब भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसके पीछे पहला कारण यह बताया जा रहा है कि समूह-20 देशों के प्रमुखों की बैठक की रूपरेखा बहुत अनौपचारिक होती है। दिनभर चलने वाली बैठकों में विभिन्न देशों के नेता एक-दूसरे से कई बार टकराते हैं। कई बार उनके बीच तय नहीं होने के बावजूद लंबी बातचीत हो जाती है। साथ ही यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि मोदी और चिनफिंग एक बंद कमरे में रूस, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के राष्ट्रपति के साथ ब्रिक्स की बैठक करेंगे। इसमें भी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मोदी और चिनफिंग मौजूदा तनाव को दूर करने के लिए कूटनीतिक दायरे से बाहर निकलने का माद्दा दिखाते हैं या नहीं।





























































