ज्योतिरादित्य का जाना दुर्भाग्यपूर्ण, सुलझाए जा सकते थे विवाद-सचिन पायलट

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) की सदस्यसता ले ली है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने को राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है, उन्होंने यह भी कहा है कि विवादों को सुलझाया जा सकता था.

सचिन पायलट ने ट्वीट कर कहा यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है कि ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है. मैं सोचता था कि पार्टी में बातचीत के जरिए विवाद सुलझा लिए गए होते. सचिन पायलट से पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तल्ख टिप्पणी की थी.

अशोक गहलोत ने बिना ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लिए हुए कहा अवसरवादी लोग पहले ही चले जाते तो ठीक रहता. इनको कांग्रेस ने बहुत कुछ दिया 17-18 साल में. अलग-अलग पदों पर रखा. सांसद बनाया, केंद्रीय मंत्री बनाया और मौका आने पर मौकापरस्ती भी दिखाई. इनको जनता कभी माफ नहीं करेगी.

‘अपने हितों के लिए छोड़ी पार्टी’
कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिंधिया के पार्टी छोड़ने पर कहा था, ‘लाभ और हानि सबकी जिंदगी में चलता रहता है. आप 4 बार सांसद रह चुके हैं. आपको कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है, इसलिए पार्टी छोड़ना ठीक नहीं है. लेकिन उन्होंने नसीहत नहीं सुनी और अपने हितों के लिए पार्टी से किनारा कर लिया.’

मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा, ‘मुझे खराब लगा कि वे पार्टी छोड़कर चले गए. 3 दिन पहले मेरी उनसे बातचीत हुई थी. मैंने उनसे कहा था कि पार्टी छोड़ने की जरूरत नहीं है. वे युवा हैं और अच्छे वक्ता हैं. पार्टी का निर्माण एक विचारधारा पर हुआ है, सबको लगता है कि यह विचारधारा लोगों को मजबूत बनाएगी.’

ज्योतिरादित्य ने बताया क्यों छोड़ी पार्टी
ज्योतिरादित्य सिंधिया बोले कि आज मन व्यथित है और दुखी भी है. जो कांग्रेस पार्टी पहले थी वो आज नहीं रही, उसके तीन मुख्य बिंदु हैं. पहला कि वास्तविकता से इनकार करना, नई विचारधारा और नेतृत्व को मान्यता नहीं मिलना. 2018 में जब MP में सरकार बनी तो एक सपना था, लेकिन वो बिखर चुका है. मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने वादे पूरे नहीं किए हैं. कांग्रेस में रहकर जनसेवा नहीं की जा सकती.

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