तुम भी खुल जाओगे दो-चार मुलक़ातों मे

0

ये हक़ीक़त है कि होता है असर बातों मे,
तुम भी खुल जाओगे दो-चार मुलक़ातों मे,

तुम से सदियों की वफाओं का कोई नाता न था,
तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों मे,

तेरे वादों ने हमें घर से निकलने न दिया,
लोग मौसम का मज़ा ले गए बरसातों में,

अब न सूरज न सितारे न शमां न चांद,
अपने ज़ख्म़ों का उजाला है घनी रातों मे।

Previous articleमैं बचपन में कामवाली बनना चाहती थी-प्रियंका चोपड़ा
Next articleव्हाट्सऐप भी जियोफोन के लिए अपना खास वर्जन लॉन्च कर सकता है

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here