भोपाल- (ईपत्रकार.कॉम) |महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा है कि धूप विटामिन-डी का मुख्य स्रोत और सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार है। धूप से बचने की संस्कृति व्यक्ति को गोरा बनाए रख सकती है पर यह स्वास्थ्य और सक्रियता को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि चटनी, गुड़ जैसी हमारी खान-पान में रची-बसी सामग्री विभिन्न विटामिन के किफायती और सहज सुलभ स्रोत हैं। उन्होंने सभी गांवों में कच्चे तेल की घानी स्थापित करने के लिये अभियान चलाने की बात भी कही। श्रीमती चिटनिस पोषण साक्षरता पर आयोजित एक-दिवसीय जिला स्तरीय संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। समन्वय भवन में आयोजित इस संगोष्ठी में देश की ख्याति-प्राप्त पोषण विशेषज्ञ सुश्री वंदना शिवा तथा डॉ. रश्मि शर्मा ने भी अपने विचार रखे। राजधानी के होटलों, छात्रावासों के रसोइयों को न्यूट्रीशन के महत्व की जानकारी देने और खान-पान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित इस संगोष्ठी में भोपाल जिले के स्व-सहायता समूहों, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनिस ने कहा कि भारतीय परिवेश तथा परम्परा से जुड़ी खान-पान की आदतों को अपनाने से व्यक्ति सरलता से पोषक खाद्य सामग्री प्राप्त कर सकता है। श्रीमती चिटनिस ने भोजन प्रणाली में सही सामग्रियों के जोड़, किफायती सामग्री से विटामिन तथा आवश्यक खनिज तत्व प्राप्त करने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता और सफाई को स्वभाव बनाने के संबंध में रुचिकर तरीके से जानकारी दी।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद् तथा पोषण विशेषज्ञ डॉ. वंदना शिवा ने कहा कि हमें इस बात के लिये सचेत रहना चाहिये कि दुनिया की 15 बड़ी कम्पनियाँ भोजन से मुनाफा कमाना चाहती हैं। भारतीय परिवारों की भोजन की थाली को कम्पनियों के मुनाफे का जरिया बनने से रोकना जरूरी है। अन्यथा भारत भोजन आधारित कम्पनियों और दवाएँ खपाने का केन्द्र बन जाएगा। उन्होंने कहा कि हमें अन्न स्वराज की राह पकड़नी होगी। सुश्री वंदना शिवा ने बताया कि भोजन से विविधता गायब होने के कारण कुपोषण बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भोजन से संबंधित आयुर्वेदिक प्रणालियाँ सम्पूर्ण परिवार के लिए लाभकारी हैं। उन्होंने हर आँगनवाड़ी में सागवाड़ी विकसित करने की आवश्यकता बताई।
पोषण साक्षरता पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए जयपुर से आयीं पोषण विशेषज्ञ डॉ. रश्मि शर्मा ने कहा कि भारतीय परम्परागत तेल जैसे सरसों, तिल, मूंगफली, नारियल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिये। इन तेलों में मिलावट का अंदेशा कम रहता है। साथ ही यह देशवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने में भी सहायक हैं। श्रीमती शर्मा ने कहा कि हम जितना प्रकृति से लय बनाकर चलेंगे, उतना ही स्वस्थ रहेंगे। उन्होंने कहा कि “हमारा पोषण हम चुने – इसे टी.व्ही. पर आने वाले विज्ञापन निर्धारित न करें”। उन्होंने इण्डस्ट्रियल फूड के स्थान पर परम्परागत खान-पान पद्धतियों को महत्व देने की बात कही।इस अवसर पर कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा पोषक सामग्रियों की प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया।



































































