कोरोना संकट के बीच बड़े पैमाने पर प्रवासी मजदूर अपने घरों को लौट चुके हैं. जिसको जो साधन मिला, उसी को पकड़कर प्रवासी मजदूर घर पहुंच गए. लॉकडाउन की वजह से ट्रेनें-बसें बंद थीं, जिस वजह से बड़ी संख्या में मजदूर बड़े शहरों से अपने गांवों के लिए पैदल ही चल दिए थे.
मजदूरों की किल्लत पर गडकरी का जवाब
दरअसल अब लॉकडाउन में छूट के बीच करीब-करीब सभी उद्योग शुरू हो चुके हैं. फिलहाल अभी कम मैनपावर के साथ इंडस्ट्रीज में प्रोडक्शन शुरू हो गया है. ऐसे में इंडस्ट्रीज को अब मजदूरों की किल्लत हो सकती है.
इंडस्ट्रीज में मजदूरों की कमी से जुड़े सवाल पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि इंडस्ट्रीज में बहुत ज्यादा कामगारों की कमी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘केवल देखने में लगता है कि सभी मजदूर घर लौट गए हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. बड़े पैमाने पर लोग अभी भी बड़े शहरों में हैं और वो अब काम पर आ रहे हैं.’
अभी बहुत ज्यादा मजदूरों की कमी नहीं
नितिन गडकरी ने कहा कि किसी भी इंडस्ट्रीज में 10 से लेकर 20 फीसदी ही प्रवासी मजदूर होते हैं. बाकी स्थानीय लोग होेते हैं. 20 फीसदी प्रवासी मजदूरों में से भी सभी घर नहीं चले गए हैं. कुछ लोग अभी भी काम पर आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूरों के चले जाने से इंडस्ट्रीज पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है.
कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बारे में जानकारी देते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि अब लगभग सभी इंडस्ट्रीज शुरू हो चुकी हैं, और जितने लोगों की जरूरत है, उतने लोग मिल जा रहे हैं. गडकरी की मानें तो कई बड़े उद्योगों ने अपने कर्मचारियों के रहने और खाने की व्यवस्था कैंपस के अंदर में ही कर दी है, जो अब काम पर आ रहे हैं.
घर से लौटने लगे हैं मजदूर: गडकरी
गडकरी का कहना है कि वहीं कुछ लोग अब अपने घरों से काम पर लौट रहे हैं. वहीं अगर जिस इंडस्ट्रीज का प्रवासी मजदूरों के बगैर काम नहीं चल रहा है, उन्हें कहा गया कि जहां इंडस्ट्रीज है और जहां से प्रवासी मजदूरों को लाना है, वहां के स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेकर मजदूरों को लाया जा सकता है. लेकिन सभी के लिए अभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहर जरूरी है.






























































