मैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिन..

0

जब रूह किसी बोझ से थक जाती है,

एहसास की लौ और भी बढ़ जाती है,

मैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिन,

ज़ंजीर सी पाँव में छनक जाती है।

Previous articleऑस्ट्रेलियाई ओपन : घुटने की चोट से उभरे नडाल की आसान जीत
Next articleलक्ष्मी जी का अपमान करता है घर में पड़ा ये सामान, तुरंत हटा दें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here