मैं सितारों के संग बेठा हूं….एक शायरी

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आसमां तू, तेरी ख्वाहिश मुझको ,
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कोई आती नहीं फरमाइश मुझको ||
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मैं सितारों के संग बेठा हूं,
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ये कहां लाई आजमाइश मुझको ||
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सब का गम मेरा ही गम लगता है ,
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लोग चाहे इसी बाईस मुझको को ||
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खूब पढ़कर समझ गया दुनिया,
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क्यूँ वह देते हैं समझाइश मुझको ||
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वो कहे झुक सलाम कर रिजवा,
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ऐसे जीने की नहीं ख्वाहिश मुझको ||

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