यूपी में किसानों की तकदीर बदलने पर होगा जोर-अमित शाह

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उत्तर प्रदेश में बिगड़ी खेती को पटरी पर लाने और सूबे के किसानों की तकदीर बदलने के लिए भाजपा ने अपनी प्रतिबद्धता एक बार फिर जाहिर की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य के छोटे व मझोले किसानों को ब्याज मुक्त ऋण देने का भी वायदा किया है। उन्होंने कहा कि साल-दर-साल गन्ना किसानों की बिगड़ती हालत की चिंता केंद्र सरकार ने की है, उसमें और सुधार पर बल दिया जायेगा। गन्ना किसानों को 14 दिन के भीतर भुगतान की गारंटी दी जाएगी।

प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी पर चिंता जताते हुए शाह ने एक सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा के पास इसका इलाज है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा दिया जायेगा। इससे जहां किसानों की उपज के अच्छे मूल्य मिलेंगे वहीं ग्रामीण युवाओं को रोजगार उपलब्ध होंगे। भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खेती किसानी की हालत खराब है। सूबे की सरकारों ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया है।

केंद्र के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बावजूद किसानों को अपनी उपज कम मूल्य पर बेचनी पड़ रही है। जबकि केंद्र सरकार ने मंडी सुधार की दिशा में कारगर पहल की है। ई-मंडी की शुरुआत की गई है, जिसके मार्फत किसान अपनी शर्तो पर उपज को बेच सकते हैं। राज्य की सभी जिंस बाजारों को ई-मंडियों में तब्दील कर दिया जायेगा। एक अन्य सवाल के जवाब में शाह ने कहा कि राज्य में भूमिहीन किसान और खेतिहर मजदूरों की हालत बहुत खराब है। राज्य सरकार में भाजपा आई तो ऐसे लोगों का दीन दयाल सुरक्षा बीमा के तहत दो लाख रुपये का बीमा कराया जाएगा, जो पूरी तरह मुफ्त होगा। छोटे व मझोले किसानों और खेतिहर मजदूरों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन्हें गोधन योजना तहत दुधारू पशु उपलब्ध कराये जाएंगे।

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तो किसानों के लिए वरदान है। लेकिन उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार इसे लागू नहीं कर सकी है। भाजपा ने राज्य में सरकार बनाई तो सभी किसानों को इसका लाभ दिया जायेगा। सिंचाई के लिए कम दरों पर बिजली दी जायेगी। अनाज भंडारण की सुविधा के साथ फलों व सब्जियों को रखने के बाबत कोल्ड स्टोरेज का प्रावधान किया जायेगा।

सिंचाई प्रणाली को मजबूत बनाने के एक सवाल पर भाजपा प्रमुख अमित शाह ने कहा कि इस दिशा में उनके पास कई बड़े प्रस्ताव हैं, जिनमें मुख्यमंत्री कृषि सिंचाई निधि का गठन करना प्रमुख होगा। बुंदेलखंड के सूखाग्रस्त इलाके के लिए अलग प्रावधान होगा। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर प्राथमिकता से काम शुरू होगा। ठप पड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

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