ये बातें जरुर सिखायें अपनी बेटी को हर मां

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माँ और बेटी के बीच फिर भी एक अलग जुड़ाव होता है, क्यूंकि दोनों औरतें होती हैं और एक दुसरे को अच्छी तरह से समझती हैं। एक माँ अपनी बच्ची के लिए पहली आदर्श होती है और छोटी बच्ची कई चीज़ें अपनी माँ से नक़ल कर सीखती है जो कई मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है। इसलिए माँ होने के नाते कुछ चीज़ें हैं जो आपको अपनी बेटी को सिखाना चाहिए।

1. स्वाभिमान
अपनी बेटी को यह बताएं कि वह जैसी भी है बहुत ही सुन्दर है और उसे अपने आप को ऐसे ही पसंद करना चाहिए। उसके अंदर स्वाभिमान और आत्मविश्वास का विकास करें, उसकी किसी से तुलना ना करे।

2. स्वतंत्रत जीवन
अपनी बेटी को यह सिखाना बहुत ज़रूरी है कि वह स्वतंत्र बने और छोटी उम्र से ही अपना काम खुद कर सके। ताकि जब वह बड़ी हो तो अपने कामों के लिए वह दूसरों पर निर्भर ना रहे।

3. कार्य का महत्व
अपनी बेटी को ऐसे पेशे की महत्ता बताएं जिसे वह पसंद करे और वह पैसों के लिए किसी पर निर्भर ना हो। यह आजकल काफी ज़रूरी है कि आपकी बेटी अपनी प्रतिभा का महत्व समझे।

4. लड़कों के प्रति, व्यवहार
अपनी बेटी से बात करें और उसे बताएं कि लड़कों के प्रति उसका व्यवहार कैसा होना चाहिए, यह तब और ज़रूरी हो जाता है जब वह किशोरावस्था में हो। उसे यह बताएं कि एक लड़के के बारे में वह तभी सोचे जब उसे ऐसा लगे कि लड़का उसके सम्पूर्ण व्यक्तित्व को पसंद करता है ना कि सिर्फ उसके शरीर को।

5. अपनी सुरक्षा
आजकल महिलाओं के साथ जो अत्याचार हो रहे हैं, यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपनी बेटी को अपने बचाव के तरीके सिखाएं ताकि वह अपने आप को अपरिचित लोगों से बचा सके। उसे अपने साथ पेपर स्प्रे रखने की सलाह दें और अपना बचाव करना सिखाने के लिए उसे इसका प्रशिक्षण दिलवाएं।

6. आत्म अभिव्यक्ति का महत्व
एक माँ को अपनी बेटी को बताना चाहिए कि अपनी मन की बात कहना ज़रूरी है और किसी परिस्थिति में दृढ़ता के साथ बोलना भी ज़रूरी होता है। वह अपने स्वाभिमान का ध्यान रखे।

7. मेकअप टिप्स
आप ऐसी माँ हो सकती है, जो अपनी बच्ची को मेकअप करना, हील वाली सैंडल में चलना, बाल संवारना आदि सिखाये। यह एक मज़ेदार तरीका हो सकता है जिससे आप अपनी बेटी के साथ जुड़ सकते हैं या उसकी एक अच्छी दोस्त बन सकती है। वह कपड़े पहनने का तरीका हो या बोलने का तरीका हो एक छोटी बच्ची अपनी माँ को देखती है और उसकी कई आदतें अपनी माँ जैसी ही होती हैं। एक माँ अपनी बेटी की पहली सबसे अच्छी दोस्त होती है और वह चाहे कितनी भी बड़ी हो जाए, अपनी माँ के पास किसी भी सलाह के लिए आती है।

8. परिवार तथा रिश्ते
और आखिरी में बेटी बड़ी होकर एक दिन नई जिम्मेदारियों में माँ के संस्कारो का परिवहन करती है। तो ऐसे में बेटी माँ का ही अनुसरण करती है, तथा माँ के सलाह से ही वो रिश्तों कि महत्व को जान तथा निभा पाती है ।

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