हम हँसते है तो दुनियाँ समझती है की हमे गम नहीं,
वैसे भी दुनिया में गम दिखाने वाले कम नहीं।
गम दिखाना भी लोगो ने बना लिया है एक कम,
उन्हें क्या मालूम गम में डूबी है मेरी सुबह–शाम।
हम उन लोगो में से नहीं कि अपना गम दिखाते रहें,
हम तो दुसरो के गम उठाए बाटते फिरे।
दुनिया ने हर वक्त ऐसे लोगो को गलत ही समझा,
अब भी कहते रहना खुद की बदौलत समझा।
हम दुनियां का कहना क्यों सोचे क्या उनका गम नही,
क्योकि गम है पर गम दिखाने वालो में से हम नहीं।

































































