जहां लोग स्वेच्छा से उठाएंगे अपने हिस्से के टैक्स का बोझ: जेटली

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केंद्र सरकार टैक्स का दायरा बढ़ाने की दिशा में जीतोड़ कोशिशें कर रही है। इसके तहत सरकार टैक्स की दरें कम करने पर भी विचार कर रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज भी कहा कि देश में अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए निचले दर के टैक्सेशन की जरूरत है। जेटली ने कहा, ‘अब हमें निचले दर के टैक्सेशन की जरूरत है, ताकि हम सेवाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकें। प्रतिस्पर्धा घरेलू नहीं, बल्कि वैश्विक है। आप सेवाओं में एक यही महत्वपूर्ण बदलाव महसूस करेंगे।’

वित्त मंत्री ने कहा कि आने वाले दशकों में देश में ऐसा माहौल बनाना होगा कि लोग नियमों के तहत स्वेच्छा से उचित टैक्स भरें। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में हमारा भारत एक ऐसा देश होने जा रहा है जहां टैक्स को लेकर लोगों का आचरण खुद-ब-खुद नियमों के अनुकूल हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हम देख पा रहे हैं कि भारत अगले दशकों में ऐसा भारत बनेगा जहां नियमों के स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।’

भारतीय राजस्व सेवा के सीमा शुल्क और केंद्रीय उत्पाद शुल्क के 68वें बैच के अधिकारियों को संबोधन के दौरान जेटली ने टैक्स को लेकर भारतीय जनमानस का जिक्र भी किया। वित्त मंत्री ने कहा, ‘पिछले सात दशकों से यह धारणा बनी हुई थी कि सरकारी राजस्व को चूना लगाना कोई अनैतिक बात नहीं। बल्कि, इसे व्यावसायिक सूझबूझ का हिस्सा माना जाता रहा। लेकिन, इस चक्कर कुछ लोगों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।’ वित्त मंत्री ने कहा कि उचित टैक्स चुकाना नागरिकों का दायित्व है और टैक्स नहीं चुकाने के गंभीर परिणाम भुगतने होते हैं।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई मौकों पर कह चुके हैं कि लोग अपने-अपने हिस्से के टैक्स का भार खुद वहन करें। गौरतलब है कि भारत में हर साल 39 लाख से भी ज्यादा लोग तिपहिया या चारपहिया वाहन खरीदते हैं, लेकिन 4 लाख से भी कम लोग 5 लाख रुपये से ऊपर इनकम टैक्स भरते हैं। ऐसे में एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार के टैक्स रेवेन्यू में समर्थ नागरिकों का उचित योगदान सुनिश्चत करवाने की कोशिश को बढ़ावा मिलना चाहिए।

टैक्स का बोझ उचित और समान रूप से हरेक व्यक्ति पर देने की दिशा में कदम उठाना बहुत जरूरी है क्योंकि अब तक मुट्ठीभर लोगों से टैक्स वसूलने की वजह से टैक्स की दर बहुत ऊंची जा रही है। नतीजतन लोग अपनी आमदनी छिपाकर टैक्स बचाने की जुगत में लगे रहते हैं।

शाह के मुताबिक, सरकार का खजाना मजबूत करने के दो ही उपाय हैं- अब तक चले आ रहे टैक्स व्यवस्था को बरकरार रखते हुए आसामान छूती दरों की ओर बढ़ा जाए या फिर टैक्स के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाकर मौजूदा टैक्स पेयर्स का बोझ कम किया जाए।

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