अब तेरे शहर में रहने को बचा ही क्या है

0

अब तेरे शहर में रहने को बचा ही क्या है,

जुदाई सह ली तो सहने को बचा ही क्या है।

सब अजनबी हैं, तेरे नाम से जाने मुझको,

पढ़ने वाला नहीं, लिखने को बचा ही क्या है।

ये भी सच है कि मेरा नाम आशिकों में नहीं,

बनके दीवाना तेरा, उछलने में रखा ही क्या है।

तू ही तू था कभी, अब मैं भी ना रहा,

वो जलवा भी नहीं मिटने को बचा ही क्या है।

मरना बाकी है तो, मर भी जायेंगे एक दिन,

सुनने बाला नहीं, कहने को बचा ही क्या है।

Previous articleभारत के लिए अमेरिकी संसद ने बदला कानून, रूस से हथियार खरीदने का रास्ता साफ
Next articleराहुल का सुषमा पर वार- डोकलाम पर सरकार ने टेके घुटने, जवानों के साथ विश्वासघात