मोहब्बत की नफ़ासत का बहाना भूल जाओगे

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मोहब्बत की नफ़ासत का बहाना भूल जाओगे,

हमारे ज़ख्म देखोगे निभाना भूल जाओगे,

हमें तो दर्द माफिक है मौसम-ए-हिज्र में हमदम,

इसे तुम जी के देखोगे ज़माना भूल जाओगे।

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