घर में न रखें पूजा से संबंधित ये सामान, अन्यथा कभी नहीं बन पाएंगे धनवान

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वैष्णव घर की सुबह देवी-देवताओं के पूजन से आरंभ होती है। पूजा-पाठ में बहुत सारी सामग्री का प्रयोग किया जाता है। जिनमें कुछ तो बाजार से इकट्ठी खरीद कर रखी जाती हैं तो अन्य प्रतिदिन ताजा लाई जाती हैं। पूजन सामग्री में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए अन्यथा नकारात्मकता हावी हो जाती है। जो कभी व्यक्ति को धनवान नहीं बनने देती।

* रंग-बिरंगे फूलों से मंदिर को सजाया जाता है। फूलों को हम घर लेकर आते हैं और इनकी सुगंध से मंदिर के वातावरण को सुगंधित बनाते हैं। कभी-कभी हम मुर्झाए एवं सूखे फूलों को अधिक दिनों तक घर में रखे रखते हैं, जिससे नकारात्मकता का संचार होता है। सूखे फूल अकाल-मृत्यु, मंगलदोष, विवाह में विलंब का कारण तथा अनेक रोगों के माध्यम से घर में उत्पात मचाने वाले होते हैं। सूखे फूलों को घर में रखना अनिष्टकारी माना जाता है।

* घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।

पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए होता है कि जिस घर पर मुसीबत आने वाली होती है उस घर से सबसे पहले लक्ष्मी यानी तुलसी चली जाती है। क्योंकि दरिद्रता, अशांति या क्लेश जहां होता है वहां लक्ष्मी जी का निवास नहीं होता।

* घी का एक दीपक नियमित जलाएं। दीपक पूजा की थाली में भगवान के सामने रखना चाहिए, ऊंची जगह या प्लेटफार्म पर नहीं। दीपक में दो जली हुई बत्तियां होनी चाहिए, एक पूर्व और एक पश्चिम मुखी। पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करनी चाहिए, दक्षिण दिशा की ओर नहीं। खंडित दीपक का प्रयोग नहीं करना चाहिए, न घर में रखना चाहिए।

* घर के पूजा घर में मूर्ति स्थापना न करें। यह गृहस्थ जीवन के लिए अच्छी नहीं मानी जाती है। आप कागज की तस्वीरें या छोटी मूर्तियां रख सकते हैं। पूजा घर में कोई खंडित प्रतिमा नहीं होनी चाहिए। साथ ही में पूजा वाले कमरे में जूते-चप्पल और झाड़ू बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। मूर्तियों का आकार छोटा होना चाहिए, बड़ी मूर्तियां घर के पूजाघर में वर्जित हैं। इनकी दिशा पूर्व, पश्चिम, उत्तर मुखी हो सकती है, लेकिन दक्षिण मुखी कभी नहीं। गणेश जी की प्रतिमा पूर्व या पश्चिम दिशा में नहीं रखनी चाहिए, गणेश जी की स्थापना के लिए सही दिशा दक्षिण है। हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति उत्तर दिशा में स्थापित करनी चाहिये ताकि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे। इन्हें दीवार से एक इंच दूर रखना चाहिए, एक-दूसरे के सम्मुख नहीं। अपने पूर्वजों की तस्वीर और खंडित मूर्तियां पूजा घर में नहीं रखनी चाहिए। अगर कोई मूर्ति खंडित हो जाए तो उसे तुरंत प्रवाहित करा देना चाहिए। पूजा घर में अपनी बहुमूल्य वस्तुएं नहीं छिपानी चाहिए। देवी-देवताओं पर चढ़ाए गए पुष्प-हार दूसरे दिन हटा देने चाहिए और भगवान को नए पुष्प-हार अर्पित करने चाहिए।

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