तो सुनो मेरी ग़ज़लों की माँ हो तुम

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तुम हमेशा पूछती थी ना,कि क्या हो तुम

तो सुनो मेरी ग़ज़लों की माँ हो तुम

और बता कितना कैसे चाहूं

जबकि मेरा सारा जहां हो तुम ।

बात मानो, खुदी में खुश रहना तुम,

आज भी मेरी खुशियों का ज़रिया हो तुम

अब खत्म करता हूँ शुरू से

मेरे इजहार की हाँ हो तुम।

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