नेत्रदान ही एक ऐसा विकल्प है जिसके माध्यम से अंधत्व पर विजय प्राप्त कर सकते है

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 बड़वानी- (ईपत्रकार.कॉम) |भारत में लाखों व्यक्ति ऐसे है जो किसी न किसी कारण से अपनी नेत्र दृष्टि खो चुके है या जन्म से नेत्रहीन है / कई दृष्टिहीन लोग इस इंतजार में है कि क्या वे किसी के नेत्रों से दुनियाँ देख पायेंगे /अभी तक कार्निया का कोई कृत्रिम विकल्प तैयार नहीं हुआ है इसलिए नेत्रदान ही एक ऐसा विकल्प है जिसके माध्यम से हम देश में ही नहीं पूरी दुनियाँ में अंधत्व पर विजय प्राप्त कर सकते है।

उक्त बातें लायंस क्लब अध्यक्ष लायन राम जाट ने शासकीय हाईस्कूल में आयोजित नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला में कही। लायंस क्लब सचिव श्रीराम यादव ने बताया कि 25 अगस्त से 8 सितम्बर तक चलने वाले 32 वें नेत्रदान जागरूकता पखवाड़ा के अंतर्गत लायंस क्लब बड़वानी सिटी द्वारा अंधत्व निवारण में सहयोग हेतु रणजीत क्लब के सामने स्तिथ शासकीय हाईस्कूल में एक नेत्रदान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया जिसमे लायंस क्लब अध्यक्ष लायन राम जाट ने बच्चों और स्कूल स्टाफ को नेत्रदान से सम्बंधित जानकारी दी जिसमे यह बताया कि नेत्रदान करने कि आवश्यकता क्यों है। नेत्रदान किनका हो सकता है, नेत्रदान के लिए कहाँ संपर्क कर सकते है, यह कितने समय में होना चाहिए और इसकी प्रक्रिया में कितना समय लगता है आदि बाँतो की जानकारी देते हुए बच्चों को हमेशा स्वस्थ्य रहने और अपनी आँखों की देखभाल से करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कैसे मृत्यु के पश्चात एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो लोगो के जीवन से अन्धकार को दूर किया जा सकता है। बस जरुरत है तो हमें आगे आने कि और हमारे समाज में जागरूकता लाने की। हमारे नेत्र अमर है इसलिए हम मरणोपरांत नेत्रदान करे और दूसरों के भी करवाये। लायन राम जाट ने बच्चों और स्टाफ के प्रश्नों के उत्तर देकर उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत किया। प्राचार्य श्री संतोष मिश्र ने बच्चों से कहा की जो भी बाते हमें बताई गई है उन्हें ग्रहण करते हुए हमें अपने आसपास के लोगो को भी बताकर जागरूक करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा की हम आगे भी भविष्य में बच्चों के बौद्धिक और मानसिक विकास हेतु कार्यशालाये आयोजित करते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती शीला निगम ने किया एवं आभार श्री राजीव जोशी ने माना, इस अवसर पर प्राचार्य श्री संतोष मिश्र, शिक्षक श्रीमती संध्या दशौरे, श्रीमती अंजलि पाण्डेय, श्रीमती स्वर्णरेखा सोलंकी एवं श्रीमती मेहरूनिसा खान के साथ स्कूल स्टाफ एवं विद्यार्थी उपस्तिथ थे

नेत्रदान से सम्बंधित जानकारियाँ :-
नेत्रदान मृत्यु के पश्चात परिवार की सहमती से करवा सकते है।
मृत्यु के पश्चात सबसे पहले नेत्रदान टीम को सुचना करे।
नेत्रदान मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर हो जाना चाहिए।
नेत्रदान में पूरी आँख कि जगह सिर्फ काली पुतली (कार्नियाँ) को ही निकाला जाता है और उसकी जगह नकली (डमी) पुतली लगा दी जाती है जिससे चेहरे पर कोई विकृति नहीं होती।
मृतक देह के स्थान पर यदि पंखा चालु हो तो उसे बंद कर दे और ए.सी. हो तो उसे चालु कर दे।
मृतक के सर के नीचे तकिया लगा दे।
नेत्रदान के लिए मृतक को कही ले जाने कि आवश्यकता नहीं होती।

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