प्यार का ये सिलसिला…

0

शुरू जो प्यार का ये सिलसिला नहीं होता,

ये रोग दिल को हमारे लगा नहीं होता।

मैं चाहता हूँ के एक पल को भूल जाऊं उसे,

मगर ख्याल है उनका जुदा नहीं होता।

कभी के मौत की बाँहों में सो गए होते,

हराम गर इसे मअबूत ने किया नहीं होता।

खुशी से ज़िंदगी अपनी भी काट गई होती,

वफ़ा के नाम पे धोखा अगर मिला नहीं होता।

वो कब्र पे मेरी दो अश्क ही बहा देते,

कसम खुदा की हमें फिर गिला नहीं होता।

कुछ और उनकी भी मजबूरियां रही होंगी,

यूँ ही तो कोई सनम बेवफा नहीं होता।

वो इस तरह से भुलाते ही क्यों हमें जाफर,

ख़राब गर ये मुक़द्दर मेरा नहीं होता।

Previous articleनैशनल सीनियर बैडमिंटन चैंपियनशिप : सिंधु और प्रणॉय बने नेशनल चैंपियन
Next articleएक काला आदमी मरने के बाद स्वर्ग गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here