चार दिसंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साथ मिल कर काम करने की पेशकश किये जाने का शरद पवार द्वारा किए गए खुलासे के कुछ दिनों बाद शिवसेना ने हैरानी जताते हुए सवाल किया है कि राकांपा प्रमुख की ‘‘उपयोगिता एवं अनुभव’’ को समझने में भाजपा को पांच साल क्यों लग गए। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामाना’ में बुधवार को प्रकाशित एक संपादकीय में यह सवाल किया गया है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से भाजपा क्या लाभ उठाने की कोशिश कर रही थी, जबकि (एनसीपी) को भगवा पार्टी के नेताओं ने ‘नेचुरली करप्ट पार्टी’ (स्वभाविक रूप से भ्रष्ट पार्टी) कह कर संबोधित किया था।
भाजपा ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर बुधवार (04 दिसंबर) को कहा कि कांग्रेस नेता ‘जमानत पर बाहर आने वालों के क्लब’ में शामिल हो गए हैं और धन शोधन मामले में पूर्व मंत्री को जमानत मिलने पर कांग्रेस की प्रतिक्रिया ‘भ्रष्टाचार का उत्सव’ मनाने का उदाहरण है। विपक्षी पार्टी पर चुटकी लेते हुए इस संदर्भ में भाजपा ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी का जिक्र भी किया। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अपने ट्वीट में कहा, ‘कांग्रेस द्वारा भ्रष्टाचार का उत्सव मनाने का यह उदाहरण है। चिदंबरम भी जमानत पर बाहर आने वालों के क्लब में शामिल हो गए।’





























































