कामसूत्र के रचयिता वात्स्यायन मुनि का जीवनकाल ईसा की पहली शताब्दी से पांचवीं शताब्दी तक माना गया है। भारतीय संस्कृति में कभी भी काम को हेय नहीं माना गया, बल्कि यहां तो काम को देव(कामदेव) की संज्ञा दी गई है। जीवन के चार पुरुषार्थ में काम को तीसरा स्थान प्राप्त है। धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष में काम को तीसरा स्थान दिया गया है।
कामसूत्र में छह भाग हैं और सातवां भाग आयुर्वेद से सम्बंधित है। स्त्री-पुरुष के बीच मधुर व स्वस्थ्य सम्बंधों के लिए कामसूत्र का ज्ञान जरूरी है, क्योंकि यह काम के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर लिखा गया है। आचार्य वात्स्यायन ने माना है कि स्त्री-पुरुष का सम्बंध पशु-पक्षियों के सम्बंध से अलग है। इनके बीच स्थापित सम्बंध पशु-पक्षियों की तरह न हो इसलिए काम का ज्ञान आवश्यक है।
हम यहां पूरे कामसूत्र को नहीं दे सकते, क्योंकि एक तो उसकी भाषा क्लिष्ट है, दूसरा अधिक देने का प्रयोजन भी नहीं है। कामसूत्र के जो मूल ज्ञान हैं उस पर ही क्रमश: प्रकाश डाला जाएगा…
स्त्री-पुरुष श्रेणी और संभोग
वात्स्यायन ने लिंग के आकार के आधार पर पुरुष को तीन वर्ग में बांटा है
1. शश (खरगोश के समान छोटे व पतले लिंग वाला)
2. वृष (बैल के समान लंबाई व मोटाई में मंझोले लिंग वाला)
3. अश्व (घोड़े के समान लंबे और मोटे लिंग वाला)
योनी के आकार व गहराई के- आधार पर स्त्रियों को भी तीन श्रेणियों में रखा गया है
1. मृगी (हिरनी के समान उथली योनि वाली)
2. बड़वा (घोड़ी के समान मझोली गहराई की योनि वाली)
3. हस्तिनी (हथिनी के समान गहरी योनि वाली)
समान YONI व लिंग वाले स्त्री-पुरुष के बीच संभोग को समान मैथुन मान गया है। समान मैथुन को सर्वोत्तम माना गया है।
इसके तीन प्रकार हैं
1 शश पुरुष का मृगी नारी के साथ
2 वृष पुरुष का बड़वा नारी के साथ
3 अश्व पुरुष का हस्तिनी नारी के साथ
योनि व लिंग की असमानता वाले स्त्री-पुरुष के संभोग को विषम संभोग माना गया है।
इसके छह प्रकार हैं
1 शश पुरुष का बड़वा नारी से
2 शश पुरुष का हस्तिनी नारी से
3 वृष पुरुष का मृगी नारी से
4 वृष पुरुष का हस्तिनी नारी से
5 अश्व पुरुष का मृगी नारी से
6 अश्व पुरुष का बड़वा नारी से
वात्स्यायन के मुताबिक विषम SAMBHOG में भी संभोग का आनन्द मिल सकता है, लेकिन…
1. अश्व पुरुष का बड़वा नारी से एवं वृष पुरुष का मृगी नारी से संभोग हो
2. अश्व पुरुष का मृगी नारी से संभोग कष्टकर हो जाता है।
3 .शश पुरुष का हस्तिनी नारी से संभोग सबसे निम्न दशा है।
4 .शश पुरुष का बड़वा नारी से, वृष पुरुष का मृगी नारी से एवं वृष पुरुष का हस्तिनी नारी से संभोग की दशा मध्यम दशा है
5 . विषम संभोग में भी नारी योनि की गहराई की अपेक्षा पुरुष लिंग की लंबाई वाला संभोग उस संभोग से श्रेष्ठ है, जिसमें नारी योनि पुरुष के लिंग से बड़ी होती है।




























































