रोहतक। पद्मभूषषण से सम्मानित और राज्यसभा सांसद मैरीकॉम की उम्र 33 साल हो चली है। वे तीन बच्चों की मां हैं और परिवार भी संभालती हैं। इसके बावजूद वे मुक्केबाजी को अलविदा कहने के मूड में नहीं हैं। मैरीकॉम के अनुसार जिस दिन देश की किसी भी युवा बॉक्सर ने उन्हें हरा दिया वह दिन रिंग में उनका आखिरी दिन होगा।
मैरीकॉम ने राजीव गांधी स्टेडियम स्थित राष्ट्रीय मुक्केबाजी संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि अभी मुझमें इतनी ताकत और मेरे पास ऐसी रणनीति है कि कोई रिंग में आसानी से नहीं हरा सकता।
महिला विश्व मुक्केबाजी में 5 स्वर्ण, एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण और ओलंपिक में एक कांस्य जीतने वाली मैरीकॉम की इच्छा अभी देश के लिए और पदक जीतने की है। मैरीकॉम ने कहा कि मेरी ख्वाहिश है कि टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर वहां तिरंगा लहराऊं। रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं करने का दर्द मैरीकॉम को आज भी सालता है। रियो का जिक्र करते ही उनके चेहरे पर यह दर्द उभर आया। उन्होंने कहा कि वो बुरा दौर था। अब उस दर्द को भूल टोक्यो ओलंपिक में सोना जीतने की तैयारी में लगी हूं। टोक्यो ओलंपिक में वह 48 या 51 किलोग्राम वर्ग में चुनौती पेश करना चाहती हैं।






























































