रोहित गुप्ता – ईपत्रकार.कॉम | शनि एक बूढ़ा ग्रह है । पुरानी वस्तु या जिस भी विषय से सम्बंधित विषय पुराना है उन विषयो का कारक होता है । जिस वस्तु की समाप्ति या किसी भी घटना, प्राणी के अंत का नाम शनि है क्योंकि शनि का स्वभाव कमी करना होता है इसकी दृष्टि जहाँ भी पड़ती है उस स्थान सम्बंधित फल की हानि करते कमी करती है । शनि मृत्यु का कारक होता है किसी भी जातक की मृत्यु होने में किसी न किसी माध्यम से शनि का योगदान होता है।जातक की मृत्यु होने के बाद जब इहलोक का जीवन समाप्त हो जाता है तब उसका शरीर शमशान में लेकर जलाया जाता है,कब्रस्थान में दफनाया जाता है इन जगहों का कारक भी शनि है।इन स्थानों पर शनि का वास रहता है, अधिकतर इन जगहों पर सुनसान रहती है अकेला पन रहता है जो शनि के ही कारक तत्व है।शनि की दृष्टि में क्रूरता होती है जिस कारण यह जहाँ दृष्टि डालता है वहाँ के फल में कमी कर देता है।
कुंडली के जिस भाव पर शनि की दृष्टि होती है उस भाव के फल में कुछ न कुछ हानि / कमी आ ही जाती है।छठे भाव पर शनि की दृष्टि शुभ फल देती है क्योंकि छठा भाव रोग, ऋण, शत्रुबाधा और कर्ज का होता है इस भाव पर शनि दृष्टि इन दुःख फलो का नाश करके जातक के लिए कल्याणकारी बन जाती है।कोई वस्तु पुरानी या उस वस्तु के आखरी समय मतलब पुरानी हो जाने के बाद आपको मिलती है तो समझ जाइए इस पुरानी वस्तु मिलने का कारण शनि होता है राहु का भी इसमें योगदान होने पर वस्तु बहुत पुरानी हो जाती है या बहुत खंडित होती है । इस तरह के विषय से सम्बंधित वस्तुए पहले ही उपयोग ही चुकी होती है।जातक का मन सबसे ज्यादा जातक को प्रभावित करता है मन का कारक चंद्र है।
जब शनि चंद्र के साथ युति या दृष्टि सम्बन्ध बनाता है या शनि कि दृष्टि चंद्र पर होती है तब जातक का मन उदास ज्यादा रहता है क्योंकि शनि उदासी का कारक है तो चंद्र मन का।इस तरह चंद्र जो मन है वह शनि के प्रभाव में आ जाता है तब वह मानसिक ख़ुशी या सुख जातक को उठाने नही देता।सुख और ख़ुशी होते हुए भी जातक को सुख और ख़ुशी की कमी महसूस होती है।यह सब शनि का ही प्रभाव होता है। शनि के कारण शुभ फल में कमी आ रही हो तब शनि शांति के लिए शनि की वस्तुओ से पीपल वृक्ष पूजा, शमी वृक्ष पूजा, शनि मन्त्र जप, शनि स्त्रोत का पाठ करना, गरीबो और असहाय लोगो की सहायता करने से, शनि का प्रभाव् शुभ प्रभाव देने लगता है।





























































