स्वस्थ भावी पीढ़ी के लिए कुपोषण के विरूद्ध जरूरी है सबकी सहभागिता -मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत

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रतलाम – ईपत्रकार.कॉम |हमारी भावी पीढ़ी स्वस्थ रहे इसके लिए कुपोषण के विरूद्ध लड़ाई में सबकी सहभागिता जरूरी है। रतलाम में इस दिशा में सराहनीय कार्य किया  जा रहा है। विभाग के साथ-साथ बच्चों की कुपोषण मुक्ति में चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन की सहभागिता सराहनीय तथा प्रेरणादायी है। यह उदगार केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गेहलोत ने आज रतलाम में आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। विश्व स्तनपान सप्ताह के अन्तर्गत जिला महिला बाल विकास एवं चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में राज्य योजना आयोग उपाध्यक्ष तथा विधायक रतलाम श्री चेतन्य काश्यप, विधायक रतलाम ग्रामीण श्री मथुरालाल डामर, विधायक आलोट श्री जितेंद्र गहलोत, महापौर रतलाम डॉक्टर सुनीता यार्दे, पूर्व महापौर द्वय श्री शैलेंद्र डागा, सुश्री आशा मौर्य, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, निगम सभापति श्री अशोक पोरवाल, श्री लाहलिंग देवदा, श्री निर्मल कटारिया, जिला महिला बाल विकास अधिकारी सुश्री सुषमा भदौरिया, अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत श्री दिनेश वर्मा आदि उपस्थित थे।

    इस कार्यशाला में रतलाम शहर के 2 वर्ष से कम आयु के कुपोषित बच्चों की माताएं तथा महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी सुपरवाइजर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा सहायिकाएं मौजूद थी।

   केंद्रीय मंत्री श्री गेहलोत ने अपने संबोधन में कहा कि शिशु मृत्यु दर के लिए कुपोषण बडी हद तक जिम्मेदार है, मध्यप्रदेश में शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राज्य शासन कृतसंल्पित है। देश में इस दिशा में मध्यप्रदेश, हरियाणा तथा कुछ अन्य राज्यों में विशेष कार्य योजना तैयार कर कार्य किया जा रहा है।

 केन्द्रीय मंत्री श्री गेहलोत ने कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा अपने कार्यों से अपनी विशिष्ट पहचान देशभर में स्थापित की गई है। बच्चों की पैदाइश के चार छह माह के भीतर यह आवश्यक होता है कि उनकी संपूर्ण जांच करवाई जाए कहीं कोई दिव्यांगता तो नहीं है। इसके लिए सामाजिक न्याय विभाग द्वारा जांच करवाने में मदद की जाती है। यदि बच्चे बोलने सुनने में असमर्थ होते हैं तो केंद्रीय सामाजिक न्याय विभाग अपनी योजना के तहत 6लाख रुपये अनुदान देकर कॉक्लियर इम्प्लांट करवाता है। इसके बाद स्पीच थेरेपी करवाई जाती है, देश भर में ऐसे 1300 बच्चों को मदद की गई है। इनमें से 1200 बच्चे सुनने लगे तथा 6 हजार से ज्यादा बच्चे बोलने लगे हैं, यह शासन और माता-पिता के लिए बड़ी उपलब्धि है। यदि रतलाम जिले में भी ऐसे बच्चे हो तो उनके आवेदन पहुंचाएं उनको मदद दी जाएगी।

 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दिव्यांग बच्चों को उपकरण साइन लैंग्वेज इत्यादि मदद की जा रही है। देशभर में लगभग 7500 कैंप आयोजित किए जा कर 12 लाख बच्चों को अंग उपकरण तथा आवश्यक मदद दी गई है। इन उपकरणों पर शासन द्वारा 650 करोड़ रुपए वहन किए गए हैं। श्री गेहलोत ने बताया कि उनके सामाजिक न्याय विभाग द्वारा छः गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बना कर विभाग की देशभर में एक अलग ही पहचान स्थापित की गई है। उन्होंने बताया कि 80 प्रतिशत से ज्यादा दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को मोटराइज्ड ट्राइसिकल दी जाती है। अब तक देश भर में 7 हजार ऐसे व्यक्तियों को मोटराइज्ड ट्राइसिकल प्रदान की जा चुकी है। विभाग के तहत गठित 4 वित्त विकास निगम द्वारा देश में डेढ़ लाख दिव्यांगों को विभिन्न रोजगार मूलक कार्यों की ट्रेनिंग दी गई है। दिव्यांगों को स्वरोजगार के लिए 4 से 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। यदि महिला है तो 3 से 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

 अपने उद्बोधन में केंद्रीय मंत्री श्री गेहलोत ने बच्चों के पालकों से भी आग्रह किया कि वह अपने बच्चों की सेहत की चिंता करें शासन-प्रशासन तो इस दिशा में सतत प्रयत्नशील है। श्री गेहलोत ने केंद्र शासन की एडिप योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों के लिए संचालित किए जाने वाले विशेष शिविर आयोजनों की जानकारी देते हुए बताया कि इन शिविरों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों को चश्मा बत्तीसी व्हीलचेयर अथवा किसी भी अंग उपकरण की आवश्यकता होगी, प्रदान किए जाएंगे। इस योजना में रतलाम जिला भी चयनित है।

शहर के सब बच्चों के कुपोषण मुक्त होने तक जारी रहेगा अभियान – काश्यप

    राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष एवं विधायक श्री चेतन्य काश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि रतलाम शहर में कुपोषण से बच्चों को मुक्त करने के लिए सराहनीय कार्य किया जा रहा है। महिला बाल विकास विभाग की कार्यकर्ताओं ने भी सराहनीय कार्य किया है, इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं। अच्छा कार्य करने वाली कार्यकर्ताओं को हम सम्मानित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुपोषण के विरुद्ध कार्य करना सबसे महत्वपूर्ण है, हम इस दिशा में कृतसंकल्पित हैं। जब तक रतलाम शहर में सभी बच्चे कुपोषण से मुक्त नहीं हो जाते हमारा अभियान जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गरीबी दूर करना कुपोषण से मुक्ति तथा शैक्षणिक विकास के साथ साथ सर्वांगीण विकास हमारा लक्ष्य है।

उन्होंने कहा कि बच्चों के 2 या 3 वर्ष की आयु तक स्वास्थ्य पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। हमने योजना बनाकर ऐसे कम आयु के बच्चों के लिए थर्ड मील की व्यवस्था भी की। हमने देखा कि नाश्ता तथा भोजन के अलावा सुपोषण के लिए थर्ड मील भी बहुत जरूरी है। हम तीसरे समय के भोजन में प्रोटीन युक्त आहार भी बच्चों को उपलब्ध करा रहे हैं। श्री काश्यप ने कहा कि शहर के ऐसे बच्चे जो मुक-बघिर है अथवा बहुत कम बोलते-सुनते है, उनकी जांच हेतु भोपाल के डॉ. जफर तथा उनकी टीम को हमने रतलाम बुलवाया है। टीम शीघ्र आकर जांच तथा उपचार की दिशा में कार्य करेगी।

   महापौर डॉ. सुनीता यार्दे ने अपने उदबोधन में कहा कि रतलाम शहर में महिला बाल विकास तथा चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन के संयुक्त अभियान के सराहनीय नतीजे सामने आए हैं। महापौर ने इस बात पर जोर दिया कि गर्भावस्था के दौरान महिला के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना अत्यंत जरूरी है। इसके साथ ही बच्चे के लिए अच्छा पोषण आहार उपलब्ध कराना भी जरूरी है। महापौर ने कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उनके द्वारा व्यक्तिगत रूचि लेकर बच्चों को कुपोषण मुक्त करने के लिए कार्य किया जा रहा है।

 कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि रतलाम शहर में महिला बाल विकास तथा चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन की संयुक्त सहभागिता के उल्लेखनीय परिणाम सामने आए हैं। विशेष कार्ययोजना बनाकर इस दिशा में कार्य किया जा रहा है। माताओं की काउंसलिंग तथा पोषण आहार युक्त थर्ड मील बच्चों को उपलब्ध कराया जा रहा है। जहां कमियां थी दूर की गई है। इसके नतीजे कें रूप में मात्र 3 महीनों में शहर के करीब 1 हजार बच्चे कुपोषण से मुक्त हो चुके हैं। यह कार्य सराहनीय होकर डॉक्यूमेंटेशन के लायक है। कलेक्टर ने चेतन्य काश्यप फाउण्डेशन की उल्लेखनीय सहभागिता के लिए उनका आभार भी व्यक्त किया। प्रारंभ में कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास सुश्री सुषमा भदौरिया ने स्वागत उदबोधन में कुपोषण मुक्ति की कार्ययोजना से अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन श्री आशीष दशोत्तर ने किया।

ढाई माह में 853 बच्चें कुपोषण से मुक्त

    चेतन्य काश्यप फाउंडेशन के सहयोग से संचालित कुपोषण अभियान में मात्र ढाई माह की अवधि में 853 बच्चें कुपोषण मुक्त हुए है। रतलाम शहर की 285 आंगनवाडियों में कुल 2752 बच्चें कुपोषित पाए गए थे। फाउंडेशन द्वारा 15 मई से कुपोषण मुक्ति अभियान आरंभ किया गया और जुलाई अंत तक यह उपलब्धि  हासिल की गई ।

59 आंगनवाडी कार्यकर्ता-सहायिका सम्मानित

    कार्यशाला में केन्द्रीय मंत्री श्री गेहलोत ने कुपोषण मुक्ति अभियान के तहत् श्रेष्ठ कार्य करने वाले 59 आंगनवाडी केन्द्रों के कार्यकर्ता व सहायिका को करीब 4.50 लाख रूपए के नगद पुरस्कार एवं दक्षता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कुपोषण मुक्ति हेतु प्रत्येक कार्यकर्ता को प्रति बच्चें पर 500 रूपए एवं सहायिका को 300 रूपए का पुरस्कार मिला। दीनदयाल नगर आंगनवाडी पर सर्वाधिक 22 बच्चें कुपोषण मुक्त होने पर कार्यकर्ता संगीता जोशी को 11 हजार व सहायिका आरती को 6600 रूपए का प्रथम पुरस्कार मिला। अंबेडकर नगर आंगनवाडी के 20 बच्चें कुपोषण से मुक्त होने पर कार्यकर्ता अनिता सोनी को 10 हजार एवं सहायिका प्रेमबाई कटारा 6 हजार रूपए का पुरस्कार दिया गया। इसी तरह न्युनतम 5 बच्चों को आंगनवाडी स्तर पर कुपोषण मुक्त करने वाली सभी कार्यकर्ता एवं सहायिका का सम्मान किया गया।

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