अपने शरीर पर अधिकार नहीं जता सकते हैं नागरिक, आधार जरूरी-केंद्र सरकार

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केंद्र सरकार ने आधार कार्ड के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारत के नागरिक आधार कार्ड हेतु लिए जाने वाले शारीरिक सैंपल के लिए मना नहीं कर सकते हैं, नागरिक अपने शरीर पर इस मुद्दे पर कोई अधिकार नहीं जता सकते हैं. मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि अपने शरीर पर पूर्ण अधिकार होना एक भ्रम है, ऐसे कई नियम हैं जो इस पर पाबंदी लगाते हैं.

पूरी तरह से सुरक्षित है आधार
केंद्र सरकार ने पैन कार्ड के लिये आधार कार्ड को अनिवार्य बनाने के फैसले का बचाव करते हुये मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में कहा कि ऐसा देश में फर्जी पैन कार्ड के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिये किया गया है. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ से कहा कि पैन का कार्यक्रम संदिग्ध होने लगा था क्योंकि यह फर्जी भी हो सकता था जबकि आधार पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत व्यवस्था है जिसके द्वारा एक व्यक्ति की पहचान को फर्जी नहीं बनाया जा सकता था.

10 लाख पैन कार्ड रद्द
रोहतगी ने कहा कि आधार की वजह से सरकार ने गरीबों के लाभ की योजनाओं और पेंशन योजनाओं के लिये 50 हजार करोड़ रूपये से अधिक की बचत की है. उन्होंने कहा कि करीब दस लाख पैन कार्ड रद्द किये जा चुके हैं जबकि 113.7 करोड आधार कार्ड जारी किये गये हैं परंतु सरकार को अभी तक इसके डुप्लीकेट का कोई मामला पता नहीं चला है.

अटार्नी जनरल ने कोर्ट से कहा कि आधार कार्ड आतंकी गतिविधियों के लिये धन मुहैया कराने की समस्या ओर काले धन के प्रचलन पर अंकुश लगाने का एक प्रभावी तरीका है. शीर्ष अदालत आयकर कानून की धारा 139एए की संविधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. यह धारा नये बजट और वित्त कानून, 2017 में लागू की गई है.

धारा 139एए में आयकर रिटर्न दाखिल करते समय आधार कार्ड की संख्या लिखना या आधार आवेदन के कार्ड हेतु पंजीकरण की जानकारी देना और पैन नंबर के आवंटन के आवेदन के साथ आधार का विवरण देना इस साल एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने इससे पहले दलील दी थी कि धारा 139एए असंवैधानिक है और यह आधार कानून के साथ सीधे टकराव में है. उन्होंने यह भी दलील दी थी कि किसी व्यक्ति को आधार के लिये सहमति देने हेतु बाध्य करने का सवाल ही नहीं उठता और यह एक ऐसा मुद्दा है जो लोकतांत्रिक भारत का अपने नागरिकों के साथ रिश्तों को बदलता है.

फर्जी पैन कार्ड पर रोक
सरकार ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि पैन कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य बनाया गया ताकि फर्जी पैन कार्ड पर अंकुश लग सके क्योंकि इसका इस्तेमाल आतंकवाद के लिए वित्तपोषण और कालाधन में हो रहा था. इसके साथ ही सरकार ने निजता पर जतायी गयी चिंताओं को भी फर्जी बताया.

सरकार ने कहा कि आधार लाने के पीछे का मकसद एक सुरक्षित और मजबूत प्रणाली बनाना था ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी व्यक्ति की पहचान को फर्जी नहीं बनाया जा सके. अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ से कहा कि कालं धन का इस्तेमाल मादक पदार्थों तथा आतंकवाद के वित्तपोषण में किया जा रहा है. इसलिए एक ऐसी और मजबूत प्रणाली लाने का फैसला किया गया जिससे एक व्यक्ति की पहचान को फर्जी नहीं बनाया जा सकता.

पैन कार्ड के लिए आधार को अनिवार्य बनाए जाने के फैसले को दी गयी चुनौती का विरोध कर रहे शीर्ष विधि अधिकारी ने कहा कि भारत में 29 करोड़ पैन कार्ड में से 10 लाख कार्ड को रद्द किया गया क्योंकि पता लगा कि कई लोगों के पास एक से ज्यादा कार्ड थे और उनका उपयोग गलत गतिविधियों में किया जा रहा था जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हो रहा था.

उन्होंने कहा कि अभी तक देश में 113.7 करोड़ आधार कार्ड जारी किए गए हैं और सरकार को दोहरे कार्ड का कोई मामला नहीं मिला है क्योंकि आधार में प्रयुक्त बायोमीट्रिक प्रणाली ऐसी एकमात्र प्रणाली है जो पूरी तरह सुरक्षित है.

शीर्ष अदालत ने आयकर कानून की धारा 139एए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर सुनवाई की. यह धारा नये बजट और वित्त कानून, 2017 में लागू की गयी है. धारा 139एए में आयकर रिटर्न दाखिल करते समय आधार कार्ड की संख्या लिखना या आधार आवेदन के कार्ड हेतु पंजीकरण की जानकारी देना और पैन नंबर के आबंटन के आवेदन के साथ आधार का विवरण देना इस साल एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है.

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