भोपाल | मध्य प्रदेश के सामाजिक न्याय विभाग ने विधवा विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए यह आदेश जारी किया है। इसके लिए विधवा महिला की आयु 45 साल से कम होनी चाहिए। मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि देश में यह अपनी तरह का सबसे पहला प्रयास है। शिवराज सिंह चौहान सरकार का कहना है कि इस स्कीम की शुरुआत के बाद हर साल करीब 1,000 विधवा होंगे।
हालांकि अभी ऐसे कोई आंकड़े नहीं हैं कि वर्तमान में विधवा महिलाओं की शादी का आंकड़ा क्या है। बता दें कि इसी साल जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि वह विधवा महिलाओं की दोबारा शादी को प्रोत्साहित करने के लिए कोई नीति बनाए।
मामले में एक अधिकारी ने बताया कि हम सुनिश्चित हैं कि इस योजना का दुरुपयोग नहीं जाएगा। क्योंकि हमने इसके लिए कुछ और भी प्रावधान रखे हैं। जैसे जो शख्स विधवा महिला से विवाह करेगा उसका पहला विवाह होना चाहिए। दोनों को डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट ऑफिस जाकर विवाह का पंजीकरण कराना होगा। ग्राम पंचायत द्वारा एक प्रूफ भी देना होगा। स्थानीय निकाय की मंजूरी स्वीकार नहीं की जाएगी। खबर के अनुसार विवाह करने वाला जोड़ा अगर ऐसा नहीं करेगा तो उन्हें दो लाख रुपए नहीं दिए जाएंगे।
मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी आदेश के बाद यह पहल की है। यह पहला मौका है, जब किसी सरकार ने विधवा विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह का ऐलान किया है। देश में 1856 में विधवा विवाह को वैध करार दिया गया था। मध्य प्रदेश सरकार ने इस स्कीम को लागू करने के लिए प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये का बजट तय किया है।



































































