खेल मंत्री श्री जीतू पटवारी ने विश्व की सबसे ऊँची पर्वत चोटी ’’माउंट एवरेस्ट’’ को फतेह करने वाली सुश्री मेघा परमार को बधाई देते हुए कहा कि दृढ़ निश्चय, कुछ कर दिखाने का जज्बा और जुनून हर मुश्किल रास्ते को आसान बनाता है। सुश्री परमार ने विगत 22 मई को सुबह 5 बजे माउंट एवरेस्ट को फतह किया।
सीहोर के छोटे से गांव भोज नगर की मेघा परमार ने 22 मई को सुबह 5 बजे सागरमाथा नाम से विख्यात विश्व के सबसे ऊंचे पर्वत ’’माउंट एवरेस्ट’’ 29,028 फीट को फतेह किया। सुश्री मेघा ने अपना सफर 5 अप्रैल को भोपाल से रवाना होकर रात काठमांडू पहुँचकर प्रारम्भ किया। आठ अप्रैल को लुक्ला पहुँची, 9 अप्रैल को लुक्ला से अपनी ट्रेकिंग प्रारम्भ कर नामचे, 11 अप्रैल को टेंगबोच, डिंगबोच, लबुचे, बोरखाशेप होते हुए 15 अप्रैल को काला पत्थर एवं एवरेस्ट बेस कैम्प पहुँची। एवरेस्ट बेस केम्प के आसपास प्रतिदिन ट्रेक करते अभ्यास किया।
सुश्री परमार ने फाइनल सम्मिट के लिये 12 मई को बेस केम्प से चढ़ाई शुरू की। बीस मई को कैम्प 4 पहुँचकर देर रात अन्तिम सम्मिट (शिखर 5) पर पहुँची। रात भर ट्रेकिंग के बाद 22 मई को सुबह 5 बजे ’’माउंट एवरेस्ट’’ शिखर पर पहुँच कर सागर माथा पर्वत को फतेह किया।
टीम के अन्य 3 सदस्य घायल/बीमार होने से अन्तिम सम्मिट नहीं कर सके। मेघा के साथ प्रदेश के श्री रत्नेश पाण्डे, 2 पर्वतारोहियों को रेस्क्यू करने की वजह और ऑक्सीज़न खत्म होने से सम्मिट नहीं कर सके। शिखर पर 30 मिनट रुकने के बाद वापस लौटते समय कैम्प 4 के नजदीक मेघा के शेरपा को फॉस व्हाईट हो जाने से वे भी बीमार हो गये। मेघा अकेली कैम्प 3 पर 22 मई की शाम लगभग 7 बजे पहुँची और 23 मई की रात तक कैम्प 3 में ही रहने के बाद रात में ट्रैक कर 24 मई को सुबह 5 बजे कैम्प 2 पहुँची।




































































