सांसों को गिरवी रख कर मांगता हूं खैर तेरी…
तु मौजुद होती है हर दुआ मे मेरी…
जग रूठे तो कहां परवाह है मुझे…
मगर मर जाऊंगा मै जो आंख तुने फेरी…
तुझ पर आए कोई मुसीबत तो झट से मै खुद पर ले लु…
तेरे बदले मैं मरने मे तनिक भी देरी ना करूं…
तेरा बाल भी बांका हो तो हो कैसे…
मेरी दुआओं ने तेरी हर सांस है घेरी…

































































