भारत अकेले शांति के रास्ते पर नहीं चल सकता- पीएम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरे रायसीना डायलॉग के उद्घाटन के मौके पर कहा कि मई 2014 में भारतीयों ने परिवर्तन के जनादेश के साथ हमारी सरकार को मौका दिया. अलग-अलग वजहों से दुनियाभर में बड़े बदलाव हो रहे हैं. दुनिया को भारत के सतत विकास की उतनी ही जरूरत है जितनी भारत को दुनिया की.

पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा कि सबका साथ, सबका विकास केवल भारत के लिए नहीं है बल्कि पूरे विश्व के लिए है. हम भारत को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि अस्थिरता, हिंसा, संघर्ष, चरमपंथ का खतरनाक दिशा में बढ़ना जारी है. प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन से इतर ताकतें (नॉन स्टेट एक्टर) इन चुनौतियों के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है. पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि दक्षिण एशिया में शांतिपूर्ण रिश्ते चाहिए.

पीएम ने कहा कि अगर पाकिस्तान भारत से बातचीत करना चाहता है तो उसे आतंकवाद से दूर चलना चाहिए. मैं खुद लाहौर गया, लेकिन भारत अकेला शांति के रास्ते पर नहीं चल सकता. पीएम ने कहा कि हम पड़ोसियों से अच्छे संबंध चाहते हैं. पिछले ढाई साल में हमने शांति के लिए काम किया है. अफगानिस्तान में इसकी मिसाल देखी जा सकती है. पीएम मोदी ने कहा कि पड़ोसियों से अच्छे संबंधों के लिए ही मैंने अपने शपथ-ग्रहण समारोह में सार्क देशों को न्योता भेजा था.

चीन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दो बड़े पड़ोसी शक्तियों के बीच कुछ मतभेद असामान्य बात नहीं है लेकिन दोनों पक्षों को संवेदनशीलता और मुख्य चिंताओं एवं हितों पर एक दूसरे प्रति सम्मान का भाव दिखाना चाहिए. मौजूदा अनुभव बताता है कि यह सदी एशिया की होगी.

पीएम ने कहा कि हमने नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी विकास के लिए सहयोग पर बात की है. रूस पर मोदी ने कहा कि वो भारत का एक स्थायी दोस्त है. राष्ट्रपति पुतिन और मैंने लंबी बातचीत की है. आतंक पर पीएम ने कहा कि जो भी हमारे पड़ोसी हिंसा, घृणा और आतंक को बढ़ावा दे रहे हैं, वे अलग थलग और उपेक्षित हैं. हम अच्छे और बुरे आतंकवाद में भेद खत्म करके इसे धर्म से अलग करना चाहते हैं.

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