रायसेन – (ईपत्रकार.कॉम) |भावांतर योजना तथा फसल बीमा योजना का लाभ प्रत्येक किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्रीमती भावना वालिम्बे की अध्यक्षता में जिले के कृषि, सहकारिता एवं राजस्व अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में फसल कटाई प्रयोग, खाद-बीज की उपलब्धता, भावांतर योजना का पंजीयन सहित अनेक मुद्दों पर चर्चा करते हुए कलेक्टर श्रीमती वालिम्बे द्वारा निर्देश दिए गए।
कलेक्टर श्रीमती वालिम्बे ने कहा कि भावांतर तथा फसल बीमा योजना की गाईडलाईन की जानकारी मैदानी अमले तथा किसान मित्रों को होना चाहिए। ताकि वे किसानों को सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव में जाकर किसानों, कृषि मित्रों तथा संबंधित लोगों को भावांतर योजना एवं फसल बीमा के बारे में विस्तार से जानकारी दें। इन योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन करने के लिए जरूरी है कि ब्लॉक स्तर के समस्त कृषि तथा राजस्व अमले की संयुक्त बैठक एसडीएम की अध्यक्षता में आयोजित की जाए।
उन्होंने निर्देश दिए कि उपार्जन केन्द्रों में भावांतर योजना के तहत किसानों का सतत् पंजीयन किया जाए। साथ ही फसल कटाई प्रयोग के परिणाम समय सीमा में ऑनलाईन फीड किए जाएं। कलेक्टर श्रीमती वालिम्बे ने फसल बीमा कम्पनी के जिले में एक ही एजेण्ट उपलब्ध होने की जानकारी मिलने पर कम्पनी को और एजेण्ट नियुक्त करने के पत्र लिखने के निर्देश उप संचालक कृषि को दिए। इसके अलावा उन्होंने आगामी फसल के लिए खाद, बीज, कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर श्री एमके जैन, उप संचालक कृषि श्री एनपी सुमन, जिला सहकारी बैंक के सीईओ श्री आरपी हजारी सहित कृषि, सहकारिता एवं राजस्व अधिकारी उपस्थित थे।
इन फसलों के लिए होगा पंजीयन
भावांतर योजना के तहत खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 में किसानों द्वारा उत्पादित फसलों सोयाबीन, उड़द, मूंग, मक्का, तुअर, तिल, राम तिल एवं मूंगफली तथा समर्थन मूल्य पर धान एवं मोटा अनाज के उपार्जन के पूर्व पंजीयन में संधोशन एवं नवीन पंजीयन किए जाने के लिए प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
उपार्जन केन्द्रों पर किए जा रहे हैं पंजीयन
किसानों के पंजीयन 11 सितम्बर से 11 अक्टूबर 2017 तक किए जाएंगे। किसान पंजीयन विगत रबी एवं खरीफ के निर्धारित उपार्जन केन्द्रों पर निःशुल्क किए जाएंगे। जिले में स्थानीय आवश्यकता के आधार पर पंजीयन केन्द्र खोला जाना आवश्यक होने पर कलेक्टर द्वारा औचित्य के साथ आयुक्त खाद्य को प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर नवीन पंजीयन केन्द्र खोलने का निर्णय लिया जा सकेगा। साथ ही किसी भी पंजीयन केन्द्र पर सामान्य क्षेत्र में न्यूनतम 200 किसान पंजीयन एवं आदिवासी क्षेत्रों में न्यूनतम 100 किसान पंजीयन तथा विगत वर्ष में 40 से कम किसानों द्वारा फसल विक्रय करने वाले उपार्जन केन्द्रों को नहीं खोला जाएगा।
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से होगा पंजीयन
किसान पंजीयन का कार्य जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से संबंध पंजीकृत प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं, वृहत्ताकार कृषि साख सहकारी संस्थाओं, पंजीकृत विपणन सोसायटी एवं विकासखण्ड स्तरीय विपणन सहकारी संस्थाओं को ही दिया जाएगा। पंजीयन केन्द्र निर्धारण के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। जिसमें उप संचालक कृषि, उपायुक्त सहकारिता, महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, जिला प्रबंधक एमपीएससीएससी, जिला आपूर्ति नियंत्रक अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी एवं लीड बैंक अधिकारी सदस्य होंगे।
किसानों को लाना होंगे यह दस्तावेज
भावांतर योजना का लाभ लेने के लिए किसान को मध्यप्रदेश का मूल निवासी होने के साथ भावांतर भुगतान योजना के पोर्टल पर किसान का पंजीयन दर्ज होना अनिवार्य है। जिन किसानों का नाम एवं जानकारी भावांतर योजना के पोर्टल पर दर्ज नहीं होगी, उन्हें योजना का लाभ प्राप्त नहीं होगा। पोर्टल पर पंजीयन के समय किसान के द्वारा स्वयं का आधार कार्ड, समग्र क्रमांक, बैंक खाता क्रमांक तथा मोबाईल नम्बर दर्ज कराया जाना अनिवार्य होगा। योजना का लाभ जिले में विगत वर्षो की फसल कटाई प्रयोगों पर आधारित औसत उत्पादकता के आधार पर उत्पादन की सीमा तक ही दिया जाएगा।
राजस्व अमले द्वारा किया जाएगा भौतिक सत्यापन
भावांतर भुगतान योजना के पोर्टल पर किसान द्वारा 11 सितम्बर से 11 अक्टूबर तक दर्ज कराई गई आठ फसलों की जानकारी तथा ई-उपार्जन में धान, ज्वार, बाजरा की एकजाई जानकारी कृषकवार राजस्व विभाग को प्राप्त हो सकेगी। कितनी भूमि पर कौन सी फसल बोई गई है, इसका कलेक्टर द्वारा राजस्व अमले से सत्यापन कराया जाएगा। भावांतर योजना की 8 फसलों के संबंध में 30 अक्टूबर तक भावांतर भुगतान योजना पोर्टल पर सत्यापन में पात्र पाया गया अथवा नहीं इन्द्राज करना होगा।






























































