रुखों के चाँद लबों के गुलाब माँगे है

0

रुखों के चाँद लबों के गुलाब माँगे है,
बदन की प्यास बदन की शराब माँगे है।

मैं कितने लम्हे न जाने कहाँ गँवा आया,
तेरी निगाह तो सारा हिसाब माँगे है।

मैं किस से पूछने जाऊं कि आज हर कोई,
मेरे सवाल का मुझसे जवाब माँगे है।

दिल-ए-तबाह का यह हौसला भी क्या कम है,
हर एक दर्द से जीने की ताब माँगे है।

बजा कि वज़ा-ए-हया भी है एक चीज़ मगर,
निशात-ए-दिल तुझे बे-हिजाब माँगे है।

Previous articleसुबह ऐसी लड़की का दिखना, घर में होगा साक्षात लक्ष्मी का प्रवेश
Next articleTRAI ने जारी किए नए नियम, अनचाहे कॉल व मैसेज से मिलेगा छुटकारा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here