आई.एफ.ए.गोली पर्याप्त संख्या में स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में पहुंचाने के कलेक्टर ने दिए निर्देश

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गुना- (ईपत्रकार.कॉम) |कलेक्टर श्री राजेश जैन ने एनीमिया की रोकथाम हेतु स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में पर्याप्त संख्या में आई.एफ.ए. गोलियां पहुंचाने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए हैं, ताकि सभी बच्चों को गोलियां खिलाई जा सकें। कलेक्टर ने यह निर्देश यहां सम्पन्न हुई साप्ताहिक आयरन फोलिक अनुपूरण कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.रामवीर सिंह रघुवंशी समेत लोक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और लोकशिक्षण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने कहा कि एनीमिया की रोकथाम हेतु बच्चों को आई.एफ.ए. गोली खिलाने के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोक स्वास्थ्य विभाग एवं लोकशिक्षण विभाग के मध्य बेहतर समन्वय का होना जरूरी है। कलेक्टर ने स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में आई.एफ.ए. गोलियां पहुंचाने के कार्य हेतु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए। कलेक्टर ने जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र को निर्देश दिए कि शिक्षकों को निर्देशित करें कि वे अपने समक्ष बच्चों को आई.एफ.ए. गोली खिलाना सुनिश्चित करें।

कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को हिदायत दी कि शिक्षकों को अवगत कराना सुनिश्चित करेंकि वे बच्चों को बताएं कि आई.एफ.ए. गोली खाने से कोई नुकसान नहीं होता। इसके लिए शिक्षक बच्चों को गोली खिलाने के पूर्व स्वयं गोली खाएं, जिससे बच्चे आसानी से गोलियां खा सकें। कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को भोजन के पूर्व हाथ धुलाई का महत्व समझाते हुए भोजन उपरान्त उन्हें आई.एफ.ए. गोली का सेवन कराया जाए।

कलेक्टर ने जिले में साप्ताहिक आयरन अनुपूरण कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिलाने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए। कलेक्टर ने यह कार्य सुनियोजित ढंग से करने की हिदायत दी। उन्होंने दूरस्थ अंचल में स्थित स्कूलों एवं आंगनवाड़ी केन्द्रों में आई.एफ.ए. गोलियां पहुंचाने पर विशेष ध्यान केन्द्रित करने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जानकारी दी कि गुना जिले में एनीमिया की प्रीवलेंस दर 67.4 प्रतिशत है। एनीमिया के कारण बच्चों की बौद्धिक एवं शारीरिक विकास, शालेय उपस्थिति व शैक्षणिक प्रगति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसकी रोकथाम हेतु आई.एफ.ए गुलाबी गोली कक्षा 1 से 5 वर्ष के बच्चों को तथा आई.एफ.ए. नीली गोली कक्षा 6 से 12 वर्ष के बच्चों को शिक्षक की निगरानी में खिलाई जाएगी।

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