सिडनी – | वैज्ञानिकों ने कुछ भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई औषधीय पौधे के अर्क तैयार किए हैं, जो मधुमेह की रोकथाम में मददगार हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया के स्विनबर्न प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 12 औषधीय पौधों के अर्क की जांच की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनमें कार्बोहाइड्रेट उपापचय में सक्रिय दो प्रमुख एन्जाइम्स को मंद करने का गुण है या नहीं, जो रक्त शर्करा और मधुमेह रोग को प्रभावित करते हैं। यह अर्क ऑस्ट्रेलिया के सात प्राचीन औषधीय पौधों और पांच भारतीय आयुर्वेदिक पौधों से निकाले गए हैं। बीएमसी कॉम्पलीमेंट्री एंड ऑल्टरनेटिव मेडिसिन पत्रिका की रपट के मुताबिक, इन अर्को में ऑस्ट्रलियाई सैंडलवुड (चंदन) और भारतीय कीनो ट्री के अर्क दोनों एंजाइम्स को मंद करने में काफी प्रभावी रहे हैं।
स्विनबर्न विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के सहलेखक एंजो पालोमबो ने कहा, मधुमेह विश्व के जन स्वास्थ्य के बोझ का प्रतिनिधित्व करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त करीब विश्वभर में 18 करोड़ से ज्यादा लोग मधुमेह से पीडि़त हैं। स्वीनबर्न के एक कथन के मुताबिक, पालोमोबा ने कहा, आठ सौ से ज्यादा पौधे पारंपरिक तौर पर किसी न किसी रूप में मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन बगैर किसी कुप्रभाव के इस रोग पर नियंत्रण कर पाना अभी भी एक चुनौती बनी हुई है।






























































