वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से।

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सुनते हैं कि मिल जाती है हर चीज दुआ से,

इक रोज तुम्हें माँग के देखेंगे ख़ुदा से।

तुम सामने होते हो तो है कैफ की बारिश,

वो दिन भी थे जब आग बरसती थी घटा से।

ऐ दिल तू उन्हें देख के कुछ ऐसे तड़पना,

आ जाए हँसी उन को जो बैठे हैं खफ़ा से।

दुनिया भी मिली है गम-ए-दुनिया भी मिला है,

वो क्यूँ नहीं मिलता जिसे माँगा था ख़ुदा से।

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