नई दिल्ली।फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने शनिवार को कहा कि इनसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) और ऐसे मुद्दों को सुलझाने के लिए सरकार की तरफ से किए जा रहे प्रयास रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों के लिए एक अच्छा अवसर है। क्योंकि दबाव में आई इन एसेट्स में अभी भी इनका स्वाभाविक मूल्य निहित है। प्राइवेट इक्विटी फर्म (PE) और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनीज (ARCs) के साथ चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि जो भी नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स वह प्रोडक्टिव एसेट्स हैं। यदि उनकी स्थिति में सुधार आता है तो उनसे न केवल अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा होंगे बल्कि राष्ट्रीय उत्पादन में भी उनका योगदान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए समय पर हस्तक्षेप, पारदर्शी तरीके से मूल्य की खोज और सही प्रबंधन की आवश्यकता है।
आरबीआई ने छांटे बड़े डिफाल्टर्स
रिजर्व बैंक ने पिछले महीने ही फंसे कर्ज वाले 12 बैंक खातों को इनसाल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 (आईबीसी), के तहत निपटाने के लिए कहा था। इससे बैंक ज्यादा दक्षता से एनपीए की समस्या से निपट सकेंगे।
ये है लिस्ट
केन्द्रीय बैंक ने जिन 12 बैंक एनपीए खातों को पहले निपटाने के लिए चुना है उनमें भूषण स्टील 44,478 करोड़ रुपए, लैंको इंफ्रा 44,365 करोड़ रुपए, एस्सार स्टील 37,284 करोड़ रुपए ,भूषण पावर 37,248 करोड़ रुपए, आलोक इंडस्ट्रीज 22,075 करोड़ रुपए, एमटेक आटो 14,075 करोड़ रुपए, मोनेट इस्पात 12,115 करोड़ रुपए, इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स 10,274 करोड़ रुपए, एरा इंफ्रा 10,065 करोड़ रुपए, जेपी इंफ्राटेक 9,635 करोड़ रुपए, एबीजी शिपयार्ड 6,953 करोड़ रुपए और ज्योति स्ट्रक्चर्स 5,165 करोड़ रुपए शामिल हैं। इनमें से 6 खातों को पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण को भेजा जा चुका है।
छह खाते में एसबीआई लीड बैंकर
इनमें 6 खातों के मामले में भारतीय स्टेट बैंक लीड बैंक है, इसिलये उसने भूषण स्टील, एस्सार स्टील और इलेक्ट्रोस्टील स्टील्स को पहले ही नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को भेज दिया। उधर पंजाब नेशनल बैंक पिछले सप्ताह भूषण पावर को एनसीएलटी को भेज चुका है।































































